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भारत के जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र
BIOSPHERE RESERVES OF INDIA

भारत के जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

भारत के सभी 18 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र, संबंधित राज्य और महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र ऐसे विस्तृत प्राकृतिक क्षेत्र होते हैं जहाँ पौधों, जीव-जंतुओं और संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों के सतत विकास पर भी ध्यान दिया जाता है। इनका उद्देश्य केवल वन्यजीवों की रक्षा करना नहीं, बल्कि जैव विविधता संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान और प्राकृतिक संसाधनों के टिकाऊ उपयोग के बीच संतुलन स्थापित करना है।

भारत में राष्ट्रीय जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र कार्यक्रम 1986 में प्रारंभ हुआ। भारत का पहला जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र नीलगिरी है, जिसकी स्थापना 1986 में हुई थी। वर्तमान में भारत में कुल 18 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र हैं।

01

जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र की संरचना

तीन प्रमुख क्षेत्र

केंद्रीय क्षेत्र जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र का सर्वाधिक संरक्षित भाग होता है। इसमें प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता को न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ संरक्षित किया जाता है।

बफर क्षेत्र केंद्रीय क्षेत्र के चारों ओर स्थित होता है। इसमें अनुसंधान, शिक्षा, प्रशिक्षण तथा पर्यावरण-अनुकूल गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है।

संक्रमण क्षेत्र बाहरी भाग होता है, जहाँ स्थानीय समुदाय रहते हैं और सतत कृषि, आजीविका तथा अन्य विकास गतिविधियाँ की जा सकती हैं।

🎯 क्रम याद रखें

केंद्रीय क्षेत्र → बफर क्षेत्र → संक्रमण क्षेत्र

02

भारत के सभी 18 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

राज्य और स्थापना वर्ष

क्रम जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र राज्य / केंद्रशासित प्रदेश स्थापना वर्ष
1 नीलगिरी तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक 1986
2 नंदा देवी उत्तराखंड 1988
3 नोकरेक मेघालय 1988
4 मन्नार की खाड़ी तमिलनाडु 1989
5 सुंदरबन पश्चिम बंगाल 1989
6 मानस असम 1989
7 ग्रेट निकोबार अंडमान और निकोबार द्वीप समूह 1989
8 सिमिलिपाल ओडिशा 1994
9 डिब्रू-सैखोवा असम 1997
10 देहांग-दिबांग अरुणाचल प्रदेश 1998
11 पचमढ़ी मध्य प्रदेश 1999
12 कंचनजंघा सिक्किम 2000
13 अगस्त्यमलाई केरल और तमिलनाडु 2001
14 अचानकमार-अमरकंटक मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ 2005
15 ग्रेट रण ऑफ कच्छ गुजरात 2008
16 शीत मरुस्थल हिमाचल प्रदेश 2009
17 शेषाचलम पहाड़ियाँ आंध्र प्रदेश 2010
18 पन्ना मध्य प्रदेश 2011
03

नीलगिरी

भारत का पहला जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

नीलगिरी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक तीन राज्यों में फैला हुआ है। इसकी स्थापना 1986 में हुई और यह भारत का पहला स्थापित जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र है।

यह पश्चिमी घाट क्षेत्र में स्थित है और इसमें मुदुमलाई, बांदीपुर, नागरहोल, वायनाड तथा साइलेंट वैली जैसे महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्रों से जुड़ा विस्तृत पारिस्थितिकी क्षेत्र शामिल है।

नीलगिरी को 2000 में यूनेस्को के विश्व जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र नेटवर्क में शामिल किया गया।

🎯 परीक्षा तथ्य

भारत का पहला जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र — नीलगिरी, 1986

04

नंदा देवी और नोकरेक

1988 में स्थापित जैवमंडल क्षेत्र

नंदा देवी उत्तराखंड में स्थित है। पुराने स्रोतों में राज्य का नाम उत्तरांचल मिल सकता है, लेकिन वर्तमान नाम उत्तराखंड है। इसकी स्थापना 1988 में हुई और इसे 2004 में यूनेस्को के विश्व नेटवर्क में शामिल किया गया।

नोकरेक मेघालय के पश्चिमी गारो पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है। इसकी स्थापना 1988 में हुई और इसे 2009 में यूनेस्को के विश्व नेटवर्क में शामिल किया गया।

05

मन्नार की खाड़ी

समुद्री जैव विविधता का महत्वपूर्ण क्षेत्र

मन्नार की खाड़ी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र तमिलनाडु में स्थित है। इसका क्षेत्र रामेश्वरम से कन्याकुमारी की ओर समुद्री एवं तटीय पारिस्थितिकी तंत्र तक फैला है।

यह प्रवाल भित्तियों, समुद्री घास, मैन्ग्रोव तथा समुद्री जीवों की विविधता के लिए प्रसिद्ध है।

इसकी स्थापना 1989 में हुई और इसे 2001 में यूनेस्को के विश्व नेटवर्क में शामिल किया गया।

06

मानस

असम

मानस जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र असम में स्थित है। इसकी स्थापना 1989 में हुई।

मानस क्षेत्र में जैव विविधता अत्यंत समृद्ध है। इसे मानस राष्ट्रीय उद्यान से भ्रमित नहीं करना चाहिए; राष्ट्रीय उद्यान और जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र की सीमाएँ तथा संरक्षण श्रेणी एक जैसी अवधारणा नहीं हैं।

मानस भारत के राष्ट्रीय स्तर पर घोषित 18 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों में शामिल है, लेकिन वर्तमान यूनेस्को विश्व जैवमंडल नेटवर्क की भारतीय सूची में शामिल नहीं है।

07

सुंदरबन

पश्चिम बंगाल का मैन्ग्रोव क्षेत्र

सुंदरबन जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र पश्चिम बंगाल में गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना डेल्टा के भारतीय भाग में स्थित है। यह विश्व के सबसे प्रसिद्ध मैन्ग्रोव क्षेत्रों में से एक है।

यह क्षेत्र रॉयल बंगाल टाइगर, खारे पानी के मगरमच्छ और विविध मैन्ग्रोव वनस्पतियों के लिए प्रसिद्ध है।

इसकी स्थापना 1989 में हुई और इसे 2001 में यूनेस्को के विश्व नेटवर्क में शामिल किया गया।

08

ग्रेट निकोबार

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह

ग्रेट निकोबार जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दक्षिणी भाग में स्थित है। इसकी स्थापना 1989 में हुई।

यह उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों, समुद्री जैव विविधता तथा विशिष्ट द्वीपीय जीव-जंतुओं के लिए महत्वपूर्ण है। निकोबारी और शोम्पेन समुदाय भी इस क्षेत्र से जुड़े हैं।

ग्रेट निकोबार को 2013 में यूनेस्को के विश्व जैवमंडल आरक्षित नेटवर्क में शामिल किया गया।

09

सिमिलिपाल

ओडिशा

सिमिलिपाल जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र ओडिशा के मयूरभंज क्षेत्र में स्थित है। इसकी स्थापना 1994 में हुई।

यह घने वनों, समृद्ध वन्यजीवों और विविध वनस्पतियों के लिए प्रसिद्ध है।

इसे 2009 में यूनेस्को के विश्व नेटवर्क में शामिल किया गया।

10

डिब्रू-सैखोवा

असम

डिब्रू-सैखोवा असम के डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया क्षेत्रों में स्थित जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र है। इसकी स्थापना 1997 में हुई।

यह नदीय एवं आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र तथा पक्षियों की विविधता के लिए महत्वपूर्ण है।

11

देहांग-दिबांग

अरुणाचल प्रदेश

देहांग-दिबांग जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश में स्थित है। इसका क्षेत्र सियांग और दिबांग घाटी से जुड़ा है। इसकी स्थापना 1998 में हुई।

पुराने नोटों में इसका नाम देहाग देंबाग जैसे रूप में मिल सकता है; सही प्रचलित नाम देहांग-दिबांग है।

12

पचमढ़ी

मध्य प्रदेश

पचमढ़ी जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र मध्य प्रदेश में स्थित है। इसकी स्थापना 1999 में हुई।

यह सतपुड़ा क्षेत्र में स्थित है और इसमें पचमढ़ी, सतपुड़ा तथा बोरी जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक क्षेत्र जुड़े हैं।

इसे 2009 में यूनेस्को के विश्व नेटवर्क में शामिल किया गया।

13

कंचनजंघा

सिक्किम

कंचनजंघा जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र सिक्किम में स्थित है। इसकी स्थापना 2000 में हुई।

यह पूर्वी हिमालय की ऊँचाई आधारित विविध पारिस्थितिकी प्रणालियों और अत्यंत समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है।

इसे 2018 में यूनेस्को के विश्व जैवमंडल आरक्षित नेटवर्क में शामिल किया गया।

⚠️ नाम में सावधानी

खंगनडेजांग जैसे विकृत रूप के स्थान पर कंचनजंघा याद करें। आधिकारिक अंग्रेजी नाम का रूप “खांगचेंदजोंगा” भी मिलता है।

14

अगस्त्यमलाई

केरल और तमिलनाडु

अगस्त्यमलाई जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र पश्चिमी घाट में केरल और तमिलनाडु दोनों राज्यों में फैला हुआ है। इसे केवल केरल में स्थित लिखना अधूरा है।

इसकी स्थापना 2001 में हुई तथा इसे 2016 में यूनेस्को के विश्व नेटवर्क में शामिल किया गया।

यह उष्णकटिबंधीय वनस्पतियों, औषधीय पौधों और पश्चिमी घाट की विशिष्ट जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है।

🎯 याद रखें

अगस्त्यमलाई — केरल + तमिलनाडु

15

अचानकमार-अमरकंटक

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़

अचानकमार-अमरकंटक जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों में फैला हुआ है। इसकी स्थापना 2005 में हुई।

यह मैकाल पर्वतीय क्षेत्र में स्थित है और नर्मदा तथा सोन नदी के उद्गम क्षेत्र के निकट होने के कारण भौगोलिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

इसे 2012 में यूनेस्को के विश्व नेटवर्क में शामिल किया गया।

16

ग्रेट रण ऑफ कच्छ

गुजरात — भारत का सबसे बड़ा जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र

ग्रेट रण ऑफ कच्छ जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र गुजरात में स्थित है और इसकी स्थापना 2008 में हुई।

इसका क्षेत्रफल लगभग 12,454 वर्ग किलोमीटर है। क्षेत्रफल की दृष्टि से यह भारत के राष्ट्रीय स्तर पर घोषित 18 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों में सबसे बड़ा है।

यह शुष्क मरुस्थलीय और लवणीय दलदली पारिस्थितिकी तंत्र के लिए प्रसिद्ध है।

🎯 अत्यंत महत्वपूर्ण

भारत का सबसे बड़ा जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र — ग्रेट रण ऑफ कच्छ, गुजरात

17

शीत मरुस्थल

हिमाचल प्रदेश

शीत मरुस्थल जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र हिमाचल प्रदेश में स्थित है। इसकी स्थापना 2009 में हुई।

इसमें पिन घाटी राष्ट्रीय उद्यान, किब्बर वन्यजीव अभयारण्य, चंद्रताल और आसपास के उच्च हिमालयी शुष्क क्षेत्र शामिल हैं।

यह हिम तेंदुआ, आइबेक्स तथा उच्च हिमालयी शीत मरुस्थलीय जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है।

सितंबर 2025 में इसे यूनेस्को के विश्व जैवमंडल आरक्षित नेटवर्क में शामिल किया गया। इसके साथ भारत के यूनेस्को-मान्यता प्राप्त जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों की संख्या बढ़कर 13 हो गई।

🎯 नवीन तथ्य

शीत मरुस्थल — हिमाचल प्रदेश — यूनेस्को विश्व नेटवर्क में 2025

18

शेषाचलम पहाड़ियाँ

आंध्र प्रदेश

शेषाचलम पहाड़ियाँ जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र आंध्र प्रदेश के पूर्वी घाट में स्थित है। इसकी स्थापना 2010 में हुई।

यह क्षेत्र विशेष रूप से लाल चंदन के प्राकृतिक वितरण के लिए प्रसिद्ध है।

यह भारत के राष्ट्रीय जैवमंडल आरक्षित क्षेत्रों में शामिल है, लेकिन वर्तमान में यूनेस्को के विश्व नेटवर्क में शामिल नहीं है।

🎯 प्रसिद्ध तथ्य

शेषाचलम — आंध्र प्रदेश — लाल चंदन

19

पन्ना

मध्य प्रदेश

पन्ना जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र मध्य प्रदेश में पन्ना और छतरपुर क्षेत्र तथा केन नदी के जलग्रहण क्षेत्र से जुड़ा है।

इसे 2011 में भारत का 18वाँ जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया।

इसे 2020 में यूनेस्को के विश्व जैवमंडल आरक्षित नेटवर्क में शामिल किया गया।

🎯 याद रखें

भारत का 18वाँ जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र — पन्ना, मध्य प्रदेश

20

यूनेस्को से मान्यता प्राप्त भारतीय क्षेत्र

वर्तमान संख्या — 13

भारत के सभी 18 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर पर घोषित हैं, लेकिन सभी यूनेस्को के विश्व जैवमंडल आरक्षित नेटवर्क में शामिल नहीं हैं।

2025 में शीत मरुस्थल के शामिल होने के बाद भारत के 13 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र यूनेस्को के विश्व नेटवर्क में शामिल हैं।

क्रम जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र यूनेस्को में शामिल होने का वर्ष
1नीलगिरी2000
2मन्नार की खाड़ी2001
3सुंदरबन2001
4नंदा देवी2004
5नोकरेक2009
6पचमढ़ी2009
7सिमिलिपाल2009
8अचानकमार-अमरकंटक2012
9ग्रेट निकोबार2013
10अगस्त्यमलाई2016
11कंचनजंघा2018
12पन्ना2020
13शीत मरुस्थल2025

⚠️ पुरानी पुस्तकों से सावधान

पुरानी पुस्तकों में यूनेस्को से मान्यता प्राप्त भारतीय जैवमंडल क्षेत्रों की संख्या 12 मिलेगी। 2025 में शीत मरुस्थल के जुड़ने के बाद वर्तमान संख्या 13 है।

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राज्य संबंधी महत्वपूर्ण जोड़ियाँ

परीक्षा में बार-बार भ्रम होने वाले तथ्य

जैवमंडल क्षेत्र सही राज्य
नीलगिरी तमिलनाडु + केरल + कर्नाटक
अगस्त्यमलाई केरल + तमिलनाडु
अचानकमार-अमरकंटक मध्य प्रदेश + छत्तीसगढ़
नंदा देवी उत्तराखंड
नोकरेक मेघालय
डिब्रू-सैखोवा असम
देहांग-दिबांग अरुणाचल प्रदेश
कंचनजंघा सिक्किम
शीत मरुस्थल हिमाचल प्रदेश
शेषाचलम आंध्र प्रदेश
पन्ना मध्य प्रदेश
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नामों में होने वाली सामान्य गलतियाँ

सही नाम एक साथ याद करें

उत्तरांचल राज्य का पुराना नाम है; वर्तमान में उत्तराखंड लिखें।

देहाग देंबाग के स्थान पर देहांग-दिबांग सही नाम है।

अगस्था मलाई के स्थान पर अगस्त्यमलाई लिखें और इसे केवल केरल से न जोड़ें; यह केरल और तमिलनाडु दोनों में फैला है।

खंगनडेजांग जैसे रूप की जगह कंचनजंघा याद करें।

अचानकमार (अमरकंटक) को पूरा नाम अचानकमार-अमरकंटक लिखना अधिक सही है।

कच्छ के स्थान पर जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र का पूरा नाम ग्रेट रण ऑफ कच्छ है।

कोल्ड डेजर्ट को हिंदी में शीत मरुस्थल लिखें।

सुदंरवन के स्थान पर सुंदरबन लिखना मानक रूप है।

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त्वरित पुनरावृत्ति

एक लाइन में महत्वपूर्ण तथ्य

🧠 एक साथ याद करें

कुल क्षेत्र—18 पहला—नीलगिरी सबसे बड़ा—ग्रेट रण ऑफ कच्छ
नीलगिरी—3 राज्य अगस्त्यमलाई—2 राज्य अचानकमार-अमरकंटक—2 राज्य
नोकरेक—मेघालय कंचनजंघा—सिक्किम देहांग-दिबांग—अरुणाचल
शीत मरुस्थल—हिमाचल शेषाचलम—आंध्र प्रदेश पन्ना—मध्य प्रदेश
यूनेस्को नेटवर्क—13 नवीनतम—शीत मरुस्थल 2025

⚡ अंतिम पुनरावृत्ति बिंदु

भारत में कुल 18 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र हैं।

भारत का पहला जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र नीलगिरी है, जिसकी स्थापना 1986 में हुई।

नीलगिरी तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में फैला है।

नंदा देवी — उत्तराखंड और नोकरेक — मेघालय में स्थित हैं।

मन्नार की खाड़ी — तमिलनाडु का महत्वपूर्ण समुद्री जैवमंडल क्षेत्र है।

मानस और डिब्रू-सैखोवा — असम में स्थित हैं।

सुंदरबन — पश्चिम बंगाल अपने मैन्ग्रोव वनों और रॉयल बंगाल टाइगर के लिए प्रसिद्ध है।

सिमिलिपाल — ओडिशा में स्थित है।

देहांग-दिबांग — अरुणाचल प्रदेश में स्थित है।

पचमढ़ी — मध्य प्रदेश में स्थित है।

अगस्त्यमलाई — केरल और तमिलनाडु दोनों राज्यों में फैला है।

कंचनजंघा — सिक्किम में स्थित है।

अचानकमार-अमरकंटक — मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में फैला है।

ग्रेट रण ऑफ कच्छ — गुजरात भारत का सबसे बड़ा जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र है।

शीत मरुस्थल — हिमाचल प्रदेश में स्थित है और 2025 में यूनेस्को विश्व नेटवर्क में शामिल हुआ।

शेषाचलम — आंध्र प्रदेश लाल चंदन के लिए प्रसिद्ध है।

पन्ना — मध्य प्रदेश भारत का 18वाँ घोषित जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र है।

2025 में शीत मरुस्थल के जुड़ने के बाद भारत के 13 जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र यूनेस्को के विश्व नेटवर्क में शामिल हैं।

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