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भारत की यूनेस्को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत
UNESCO INTANGIBLE CULTURAL HERITAGE OF INDIA

भारत की यूनेस्को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत

परंपराएँ, नृत्य, धार्मिक अनुष्ठान, पारंपरिक शिल्प और सांस्कृतिक उत्सव

अमूर्त सांस्कृतिक विरासत क्या है?

अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में ऐसी जीवित परंपराएँ, मौखिक अभिव्यक्तियाँ, प्रदर्शन कलाएँ, सामाजिक रीति-रिवाज, उत्सव, पारंपरिक ज्ञान और शिल्प-कौशल शामिल होते हैं, जिन्हें समुदाय पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाते हैं। ये किसी किले, मंदिर या इमारत जैसी भौतिक वस्तु नहीं, बल्कि जीवित सांस्कृतिक परंपराएँ होती हैं।

भारत की अनेक सांस्कृतिक परंपराएँ यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल हैं। वर्ष 2025 में दीपावली के शामिल होने के बाद भारत के ऐसे सूचीबद्ध तत्वों की संख्या 16 हो गई।

01

कुटियाट्टम — 2008

केरल की संस्कृत रंगमंच परंपरा

कुटियाट्टम — केरल — 2008। कुटियाट्टम भारत की अत्यंत प्राचीन जीवित संस्कृत रंगमंच परंपराओं में से एक है। इसका विकास मुख्यतः केरल के मंदिरों से जुड़ा है। इसमें अभिनय, नेत्र-अभिनय, हस्त-मुद्राओं और चेहरे के भावों का विशेष महत्व है।

इसे संस्कृत नाट्य परंपरा का महत्वपूर्ण जीवित रूप माना जाता है। परीक्षा में कुटियाट्टम — केरल की जोड़ी विशेष रूप से याद रखें।

02

वैदिक मंत्रोच्चार की परंपरा — 2008

वेदों के शुद्ध मौखिक पाठ की प्राचीन परंपरा

वैदिक जाप अथवा वैदिक मंत्रोच्चार की परंपरा — 2008। इसमें वेदों के मंत्रों को निश्चित स्वर, उच्चारण और क्रम के अनुसार मौखिक रूप से याद करके पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित किया जाता है।

वेदों के पाठ को हजारों वर्षों तक लगभग मूल रूप में सुरक्षित रखने में भारत की मौखिक परंपरा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

03

रामलीला — 2008

रामायण का पारंपरिक मंचन

रामलीला — 2008। रामलीला रामायण की कथा का पारंपरिक नाट्य मंचन है। इसमें भगवान राम के जीवन, वनवास, सीता हरण, रावण-वध और अयोध्या वापसी जैसे प्रसंग प्रस्तुत किए जाते हैं।

उत्तर भारत के अनेक क्षेत्रों में नवरात्र और दशहरा के अवसर पर रामलीला का आयोजन विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

04

रम्माण — 2009

गढ़वाल हिमालय की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा

रम्माण — गढ़वाल हिमालय, उत्तराखंड — 2009। यह गढ़वाल हिमालय के धार्मिक उत्सवों, अनुष्ठानों, मुखौटा नृत्यों, गीतों और नाट्य प्रस्तुतियों से जुड़ी सांस्कृतिक परंपरा है।

यह विशेष रूप से उत्तराखंड के चमोली क्षेत्र की ग्रामीण सांस्कृतिक परंपरा से संबंधित है।

05

मुदियेट्टू — 2010

केरल का अनुष्ठानिक नृत्य-नाटक

मुदियेट्टू — केरल — 2010। यह केरल की अनुष्ठानिक नृत्य-नाटक परंपरा है। इसका प्रमुख कथानक देवी काली और दारिक नामक असुर के संघर्ष से संबंधित है।

यह मुख्यतः मंदिरों और स्थानीय समुदायों से जुड़ी धार्मिक प्रदर्शन परंपरा है।

06

कालबेलिया लोकगीत एवं नृत्य — 2010

राजस्थान की प्रसिद्ध लोक परंपरा

कालबेलिया लोकगीत एवं नृत्य — राजस्थान — 2010। यह राजस्थान के कालबेलिया समुदाय की प्रमुख सांस्कृतिक पहचान है। इसके नृत्य में शरीर की लचीली और सर्प जैसी गतियाँ विशेष रूप से दिखाई देती हैं।

कालबेलिया समुदाय परंपरागत रूप से सर्पों और उनसे संबंधित ज्ञान से भी जुड़ा रहा है।

07

छाऊ नृत्य — 2010

पूर्वी भारत की युद्धक एवं लोक नृत्य परंपरा

छाऊ नृत्य — 2010। छाऊ पूर्वी भारत की प्रसिद्ध नृत्य परंपरा है, जिसमें युद्धक गतियों, लोक परंपराओं और पौराणिक कथाओं का समावेश मिलता है।

छाऊ की तीन प्रमुख शैलियाँ हैं—सरायकेला छाऊ — झारखंड, पुरुलिया छाऊ — पश्चिम बंगाल और मयूरभंज छाऊ — ओडिशा।

🎯 परीक्षा में बहुत महत्वपूर्ण

छाऊ की तीन शैलियाँ — सरायकेला, पुरुलिया और मयूरभंज।

08

लद्दाख का बौद्ध मंत्रोच्चार — 2012

पवित्र बौद्ध ग्रंथों के पाठ की परंपरा

लद्दाख का बौद्ध जाप अथवा बौद्ध मंत्रोच्चार — 2012। इसमें लद्दाख क्षेत्र के बौद्ध भिक्षु पवित्र बौद्ध ग्रंथों और मंत्रों का पारंपरिक तरीके से पाठ करते हैं।

यह धार्मिक अनुष्ठानों, त्योहारों और मठीय जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

09

संकीर्तन — 2013

मणिपुर की गायन, वादन और नृत्य परंपरा

मणिपुर का संकीर्तन — 2013। यह मणिपुर की वैष्णव परंपरा से जुड़ा अनुष्ठानिक गायन, मृदंग वादन और नृत्य का संयुक्त रूप है।

इसे केवल “संकीर्तन नृत्य” कहना अधूरा है, क्योंकि इसमें गायन, वादन और नृत्य तीनों शामिल होते हैं।

10

जंडियाला गुरु के ठठेरों की पारंपरिक कला — 2014

पंजाब में पीतल और तांबे के बर्तन बनाने की शिल्प परंपरा

जंडियाला गुरु के ठठेरों की पीतल और तांबे के बर्तन बनाने की पारंपरिक कला — पंजाब — 2014। ठठेरा समुदाय पारंपरिक विधियों से तांबे और पीतल की चादरों को पीटकर उपयोगी बर्तन तैयार करता है।

जंडियाला गुरु विरासत का नाम नहीं, बल्कि पंजाब में इस शिल्प परंपरा से जुड़ा स्थान है। सूचीबद्ध विरासत ठठेरा समुदाय की पारंपरिक धातु-शिल्प कला है।

⚠️ महत्वपूर्ण सुधार

केवल “जंडियालागुरु — 2014” लिखना अधूरा है। सही तथ्य है—जंडियाला गुरु, पंजाब के ठठेरा समुदाय की पीतल एवं तांबे के बर्तन बनाने की पारंपरिक कला — 2014।

11

योग — 2016

भारत की प्राचीन शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक परंपरा

योग — 2016। योग भारत की प्राचीन परंपरा है, जिसमें शरीर, मन और चेतना के संतुलन पर बल दिया जाता है। इसमें आसन, प्राणायाम, ध्यान और अन्य अभ्यास शामिल होते हैं।

योग आज विश्व के अनेक देशों में स्वास्थ्य, मानसिक शांति और जीवनशैली से जुड़ी महत्वपूर्ण परंपरा के रूप में अपनाया जाता है।

12

नवरोज — 2016

वसंत और नववर्ष से जुड़ा बहुराष्ट्रीय सांस्कृतिक उत्सव

नवरोज — 2016। नवरोज वसंत ऋतु और नववर्ष के आगमन से जुड़ा प्राचीन सांस्कृतिक उत्सव है। यह केवल भारत की परंपरा नहीं, बल्कि अनेक देशों द्वारा संयुक्त रूप से मान्यता प्राप्त बहुराष्ट्रीय सांस्कृतिक विरासत है।

भारत में पारसी समुदाय सहित विभिन्न समुदायों में नवरोज का विशेष सांस्कृतिक महत्व है।

13

कुंभ मेला — 2017

भारत का विशाल धार्मिक एवं सांस्कृतिक समागम

कुंभ मेला — 2017। यह भारत की विशाल धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान तथा धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

कुंभ का आयोजन परंपरागत रूप से प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक से जुड़ा है। इन चार स्थानों की जोड़ी परीक्षा में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

14

कोलकाता की दुर्गा पूजा — 2021

पश्चिम बंगाल का प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक उत्सव

कोलकाता की दुर्गा पूजा — 2021। दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल का प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव है। यूनेस्को की सूची में इसका नाम विशेष रूप से कोलकाता की दुर्गा पूजा के रूप में दर्ज है।

इस उत्सव में देवी दुर्गा की प्रतिमाओं, विशाल पंडालों, पारंपरिक शिल्प, संगीत, धार्मिक अनुष्ठानों और सामुदायिक भागीदारी का अद्भुत संगम दिखाई देता है।

15

गुजरात का गरबा — 2023

नवरात्रि से जुड़ा पारंपरिक सामूहिक नृत्य

गुजरात का गरबा — 2023। गरबा गुजरात का प्रसिद्ध धार्मिक और लोकनृत्य है, जो विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान किया जाता है। इसमें लोग देवी शक्ति की आराधना करते हुए गोलाकार रूप में सामूहिक नृत्य करते हैं।

गरबा को 2023 में यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया।

16

दीपावली — 2025

प्रकाश और सांस्कृतिक उत्सव की भारतीय परंपरा

दीपावली — 2025। दीपावली भारत का प्रमुख प्रकाश पर्व है, जिसे देश के विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों में विविध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के साथ मनाया जाता है।

दीपावली अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रूप में प्रसिद्ध है। इसे 2025 में यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया।

📗 नवीनतम तथ्य

दीपावली — 2025 भारत की इस सूची में शामिल नवीनतम विरासत है। इसके बाद भारत के सूचीबद्ध तत्वों की संख्या 16 हो गई।

17

वर्ष के अनुसार पूरी सूची

एक नज़र में सभी 16 विरासतें

क्रम अमूर्त सांस्कृतिक विरासत प्रमुख क्षेत्र वर्ष
1कुटियाट्टमकेरल2008
2वैदिक मंत्रोच्चार की परंपराभारत2008
3रामलीलाभारत2008
4रम्माणउत्तराखंड2009
5मुदियेट्टूकेरल2010
6कालबेलिया लोकगीत एवं नृत्यराजस्थान2010
7छाऊ नृत्यझारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा2010
8लद्दाख का बौद्ध मंत्रोच्चारलद्दाख2012
9संकीर्तनमणिपुर2013
10जंडियाला गुरु के ठठेरों की पारंपरिक धातु-शिल्प कलापंजाब2014
11योगभारत2016
12नवरोजबहुराष्ट्रीय2016
13कुंभ मेलाभारत2017
14कोलकाता की दुर्गा पूजापश्चिम बंगाल2021
15गुजरात का गरबागुजरात2023
16दीपावलीभारत2025
18

महत्वपूर्ण भ्रम और सही तथ्य

परीक्षा में गलती से बचने के लिए

पुराना: भारत की यूनेस्को अमूर्त सांस्कृतिक विरासतें — 14। वर्तमान तथ्य: 2025 में दीपावली के शामिल होने के बाद कुल 16।

अधूरा: जंडियालागुरु — 2014। सही: जंडियाला गुरु, पंजाब के ठठेरा समुदाय की पीतल एवं तांबे के बर्तन बनाने की पारंपरिक कला — 2014।

अधूरा: मणिपुर संकीर्तन नृत्य। सही: मणिपुर का संकीर्तन — अनुष्ठानिक गायन, मृदंग वादन और नृत्य — 2013।

अधूरा: दुर्गा पूजा। सही: यूनेस्को में सूचीबद्ध नाम कोलकाता की दुर्गा पूजा — 2021 है।

भ्रम: नवरोज केवल भारत की विरासत है। सही: नवरोज बहुराष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत है, जिसमें भारत भी सहभागी देश है।

भ्रम: छाऊ केवल एक राज्य का नृत्य है। सही: इसकी तीन प्रमुख शैलियाँ सरायकेला — झारखंड, पुरुलिया — पश्चिम बंगाल और मयूरभंज — ओडिशा हैं।

पुरानी सूची में छूटा: गुजरात का गरबा — 2023।

पुरानी सूची में छूटा: दीपावली — 2025।

⚡ अंतिम त्वरित पुनरावृत्ति

कुटियाट्टम — केरल — 2008।

वैदिक मंत्रोच्चार — 2008।

रामलीला — 2008।

रम्माण — उत्तराखंड — 2009।

मुदियेट्टू — केरल — 2010।

कालबेलिया — राजस्थान — 2010।

छाऊ नृत्य — 2010।

लद्दाख का बौद्ध मंत्रोच्चार — 2012।

संकीर्तन — मणिपुर — 2013।

जंडियाला गुरु के ठठेरों की पारंपरिक धातु-शिल्प कला — पंजाब — 2014।

योग — 2016।

नवरोज — 2016।

कुंभ मेला — 2017।

कोलकाता की दुर्गा पूजा — 2021।

गुजरात का गरबा — 2023।

दीपावली — 2025।

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