अन्य प्रमुख भौगोलिक तथ्य
हिमालय, पर्वत श्रेणियाँ, दर्रे, हिमनद, समुद्री तट, द्वीप समूह एवं परीक्षा के महत्वपूर्ण तथ्य
भारत की भौतिक संरचना — एक नज़र में
भारत की भौतिक संरचना में उत्तर का विशाल हिमालय, प्राचीन प्रायद्वीपीय पर्वत, पश्चिमी एवं पूर्वी घाट, तटीय मैदान, हिमनद तथा अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में स्थित द्वीप समूह महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में इनके स्थान, सर्वोच्च चोटियों, दर्रों तथा पारस्परिक स्थिति से नियमित रूप से प्रश्न पूछे जाते हैं।
हिमालय की प्रमुख श्रेणियाँ
Great Himalaya • Lesser Himalaya • Shiwalik
हिमाद्रि या बृहत हिमालय हिमालय की सबसे उत्तरी, सबसे ऊँची तथा तीन मुख्य समानांतर हिमालयी श्रेणियों में सबसे प्राचीन मानी जाने वाली श्रेणी है।
हिमाद्रि हिमालय का सर्वाधिक ऊँचा भाग है और विश्व की अनेक अत्यधिक ऊँची पर्वत चोटियाँ इसी विशाल हिमालयी क्षेत्र में स्थित हैं।
लघु हिमालय या हिमाचल बृहत हिमालय और शिवालिक श्रेणियों के मध्य स्थित है।
पीर पंजाल और धौलाधार लघु हिमालय की महत्वपूर्ण पर्वत श्रेणियों में गिनी जाती हैं।
शिवालिक हिमालय की सबसे दक्षिणी और नवीनतम पर्वत श्रेणी है। यह हिमालय का पर्वतपदीय भाग बनाती है।
🎯 परीक्षा में याद रखें
उत्तर से दक्षिण क्रम — हिमाद्रि → हिमाचल → शिवालिक
दून और द्वार
Himalayan Valleys & Foothills
लघु हिमालय और शिवालिक श्रेणी के बीच कई लंबी एवं समतल घाटियाँ पाई जाती हैं। पश्चिमी हिमालय में ऐसी घाटियों को दून कहा जाता है।
देहरादून इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है।
पूर्वी हिमालय के पर्वतपदीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले जलोढ़ मैदानों के लिए दुआर या द्वार शब्द प्रचलित है।
📗 अंतर समझें
दून — पश्चिमी हिमालय की घाटियाँ।
दुआर/द्वार — पूर्वी हिमालय के पर्वतपदीय मैदान।
पीर पंजाल, धौलाधार एवं कुल्लू घाटी
Western Himalaya
पीर पंजाल श्रेणी लघु हिमालय की महत्वपूर्ण श्रृंखला है और इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर तथा हिमाचल प्रदेश के हिमालयी क्षेत्र तक पाया जाता है।
धौलाधार श्रेणी हिमाचल प्रदेश की प्रमुख हिमालयी पर्वत श्रेणी है।
कुल्लू घाटी हिमाचल प्रदेश में व्यास नदी के साथ विकसित एक प्रमुख हिमालयी घाटी है। सामान्य परीक्षा-भूगोल में इसे पीर पंजाल एवं धौलाधार से संबंधित मध्यवर्ती हिमालयी क्षेत्र में रखा जाता है।
पश्चिम से पूर्व हिमालय का विभाजन
Regional Division of Himalaya
नदी घाटियों के आधार पर हिमालय को विभिन्न भागों में विभाजित किया जाता है।
सिंधु और सतलुज नदियों के बीच स्थित हिमालयी भाग को परंपरागत भूगोल में पंजाब हिमालय कहा जाता है। इसे अनेक पुस्तकों में कश्मीर हिमालय और हिमाचल हिमालय से संबंधित क्षेत्र के रूप में भी वर्णित किया जाता है।
सतलुज और काली नदी के बीच का भाग सामान्यतः कुमाऊँ हिमालय, काली और तीस्ता के बीच का भाग नेपाल हिमालय तथा तीस्ता और दिहांग के बीच का भाग असम हिमालय कहलाता है।
अरावली पर्वतमाला
Aravalli Range
अरावली भारत की सबसे प्राचीन पर्वत प्रणालियों में से एक है और प्रतियोगी परीक्षाओं में इसे सामान्यतः भारत की प्राचीनतम पर्वत श्रेणी कहा जाता है।
लंबे समय से होने वाले अपरदन के कारण अरावली अत्यधिक घिस चुकी है। परीक्षा-भूगोल में इसे प्रायः अवशिष्ट पर्वत के उदाहरण के रूप में पढ़ाया जाता है।
गुरु शिखर अरावली पर्वतमाला की सर्वोच्च चोटी है। यह राजस्थान के माउंट आबू क्षेत्र में स्थित है और इसकी ऊँचाई लगभग 1,722 मीटर है।
सतपुड़ा एवं मालवा का पठार
Peninsular India
सतपुड़ा पर्वत श्रेणी मध्य भारत में नर्मदा और ताप्ती नदियों के बीच स्थित है।
नर्मदा नदी सामान्यतः विंध्य के दक्षिण और सतपुड़ा के उत्तर से पश्चिम की ओर बहती है, जबकि ताप्ती सतपुड़ा के दक्षिणी क्षेत्र से होकर पश्चिम की ओर अरब सागर में जाती है।
मालवा का पठार मध्य भारत का महत्वपूर्ण पठारी भाग है। इसका विस्तार विंध्य के उत्तर तथा अरावली के पूर्व की ओर है।
दक्षिण भारत की पर्वत श्रेणियाँ
Southern Hills
अनाईमुडी दक्षिण भारत की सर्वोच्च पर्वत चोटी है। यह केरल में पश्चिमी घाट की अनामलाई पहाड़ियों के क्षेत्र में स्थित है और इसकी ऊँचाई लगभग 2,695 मीटर है।
नीलगिरि पर्वतमाला केवल तमिलनाडु और केरल तक सीमित नहीं है; इसका विस्तार तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के संगम क्षेत्र में पाया जाता है।
पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट दक्षिण भारत में नीलगिरि क्षेत्र के निकट एक-दूसरे के समीप आते हैं।
इलायची पहाड़ियाँ दक्षिणी पश्चिमी घाट का भाग हैं और मुख्यतः केरल में स्थित हैं; इनका विस्तार तमिलनाडु की ओर भी मिलता है। इन्हें केवल केरल और तमिलनाडु की निश्चित राज्य-सीमा कहना उचित नहीं है।
शेवराय पहाड़ियाँ तमिलनाडु में स्थित पूर्वी घाट की महत्वपूर्ण पहाड़ियाँ हैं।
🎯 बहुत महत्वपूर्ण
दक्षिण भारत की सबसे ऊँची चोटी — अनाईमुडी
पश्चिमी तट एवं कोंकण
Western Coastal Plain
महाराष्ट्र और कर्नाटक के मध्य स्थित पश्चिमी घाट को “कोंकण” कहना सही नहीं है। पश्चिमी घाट को महाराष्ट्र में व्यापक रूप से सह्याद्रि भी कहा जाता है।
कोंकण पश्चिमी तटीय मैदान के महाराष्ट्र और गोवा वाले भाग से संबंधित नाम है।
कर्नाटक के पश्चिमी तटीय मैदान को सामान्यतः कन्नड़ या कनारा तट कहा जाता है।
केरल के पश्चिमी तटीय भाग को सामान्यतः मालाबार तट कहा जाता है।
⚠️ भ्रम से बचें
कोंकण पर्वत श्रेणी नहीं है। यह पश्चिमी तटीय मैदान के एक भाग का नाम है।
पालघाट दर्रा
Palghat Gap
पालघाट दर्रा पश्चिमी घाट में स्थित एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक दर्रा है।
यह नीलगिरि पहाड़ियों और अनामलाई पहाड़ियों के बीच स्थित है।
यह केरल और तमिलनाडु के बीच प्राकृतिक आवागमन का महत्वपूर्ण मार्ग प्रदान करता है।
विश्व एवं भारत की महत्वपूर्ण चोटियाँ
Important Mountain Peaks
माउंट एवरेस्ट विश्व की सबसे ऊँची पर्वत चोटी है। इसकी मान्य ऊँचाई 8,848.86 मीटर है।
माउंट एवरेस्ट को नेपाल में सागरमाथा और तिब्बती परंपरा में चोमोलुंगमा के नाम से जाना जाता है।
के-2 या गॉडविन ऑस्टिन काराकोरम की सर्वोच्च और विश्व की दूसरी सबसे ऊँची चोटी है। इसकी ऊँचाई लगभग 8,611 मीटर है।
के-2 उस क्षेत्र में स्थित है जो वर्तमान में पाकिस्तान के प्रशासन में है और जिस पर भारत अपना दावा रखता है। इसलिए “भारत की सर्वोच्च चोटी के-2” वाले पुराने परीक्षा-वाक्य को राजनीतिक-भौगोलिक संदर्भ समझकर पढ़ना चाहिए।
भारत के वर्तमान प्रशासनिक क्षेत्र से संबंधित सर्वोच्च प्रमुख शिखर कंचनजंगा है, जो भारत-नेपाल सीमा पर स्थित है और जिसकी ऊँचाई लगभग 8,586 मीटर है।
नंदा देवी उत्तराखंड में स्थित है। यह भारत की सीमा के पूर्णतः अंदर स्थित सबसे ऊँची प्रमुख पर्वत चोटी मानी जाती है और इसकी ऊँचाई लगभग 7,816 मीटर है।
काराकोरम एवं राकापोशी
Karakoram Range
काराकोरम पर्वत श्रेणी मध्य एशिया की विशाल पर्वतीय प्रणाली का महत्वपूर्ण भाग है और इसमें विश्व की अनेक अत्यधिक ऊँची चोटियाँ तथा विशाल हिमनद पाए जाते हैं।
पुरानी सामान्य ज्ञान पुस्तकों में काराकोरम को कभी-कभी “उच्च एशिया की रीढ़” जैसे वर्णनात्मक नाम से उल्लेखित किया जाता है। इसे औपचारिक भौगोलिक उपाधि न माना जाए।
राकापोशी काराकोरम पर्वत प्रणाली में स्थित एक अत्यंत ऊँची और तीव्र उत्थान वाली चोटी है।
राकापोशी को लद्दाख पर्वत श्रेणी में स्थित कहना सही नहीं है। यह काराकोरम क्षेत्र में वर्तमान पाकिस्तान-प्रशासित गिलगित-बाल्टिस्तान में स्थित है।
कुछ सामान्य ज्ञान पुस्तकों में इसे विश्व की सर्वाधिक तीव्र ढाल वाली चोटियों में बताया जाता है, लेकिन “विश्व की सर्वाधिक तीव्र ढाल वाली चोटी” को निर्विवाद वैज्ञानिक रिकॉर्ड की तरह याद करना सुरक्षित नहीं है।
हिमालय का पूर्वी विस्तार
Eastern Extension
हिमालय पूर्व की ओर दिहांग घाटी के बाद तेजी से दक्षिण की ओर मुड़ता है। इस क्षेत्र की पहाड़ियों को सामूहिक रूप से पूर्वांचल कहा जाता है।
पटकोई, नागा, मणिपुर और मिजो पहाड़ियाँ पूर्वांचल की महत्वपूर्ण पर्वत श्रृंखलाएँ हैं।
अराकान योमा म्यांमार में स्थित पर्वत श्रेणी है। इसे सीधे हिमालय की तीन मुख्य श्रेणियों में से एक कहना सही नहीं है, बल्कि यह पूर्वी वलित पर्वतीय प्रणाली के दक्षिणी विस्तार से संबंधित है।
भारत के महत्वपूर्ण हिमालयी दर्रे
Important Mountain Passes
| दर्रा | राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|---|
| माना दर्रा | उत्तराखंड | उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र को तिब्बत से जोड़ने वाला प्राचीन मार्ग। |
| नीति दर्रा | उत्तराखंड | भारत-तिब्बत सीमा के समीप महत्वपूर्ण हिमालयी दर्रा। |
| लिपुलेख दर्रा | उत्तराखंड | भारत-नेपाल-चीन त्रिजंक्शन के निकट; कैलाश-मानसरोवर मार्ग से संबंधित। |
| नाथू ला | सिक्किम | सिक्किम को तिब्बत से जोड़ने वाला ऐतिहासिक व्यापारिक मार्ग। |
| रोहतांग दर्रा | हिमाचल प्रदेश | कुल्लू क्षेत्र को लाहौल-स्पीति की ओर जोड़ता है। |
| बनिहाल दर्रा | जम्मू-कश्मीर | पीर पंजाल क्षेत्र का महत्वपूर्ण दर्रा। |
| बुर्जिल दर्रा | कश्मीर क्षेत्र | श्रीनगर घाटी को गिलगित क्षेत्र की दिशा से जोड़ने वाला ऐतिहासिक मार्ग। |
⚠️ महत्वपूर्ण सुधार
बनिहाल को पीर पंजाल से जोड़ना सही है, लेकिन बुर्जिल दर्रे को पीर पंजाल श्रेणी में रखना सही नहीं है। बुर्जिल दर्रा महान हिमालय से संबंधित कश्मीर क्षेत्र में स्थित है।
भारत के महत्वपूर्ण हिमनद
Glaciers of India
सियाचिन हिमनद काराकोरम क्षेत्र में लद्दाख के उत्तर में स्थित एक अत्यंत विशाल हिमनद है। सामान्य भारतीय परीक्षाओं में इसे भारत का सबसे बड़ा या सबसे लंबा हिमनद कहा जाता है।
यह विश्व के ध्रुवीय क्षेत्रों के बाहर स्थित सबसे लंबे पर्वतीय हिमनदों में से एक है।
चोराबाड़ी हिमनद उत्तराखंड में केदारनाथ क्षेत्र के उत्तर में स्थित है।
चोराबाड़ी हिमनद को केदारनाथ हिमनद भी कहा जाता है और यह मंदाकिनी नदी के उद्गम क्षेत्र से संबंधित है।
भारत का समुद्र तल मापन
Mean Sea Level
भारत में ऊँचाइयों के निर्धारण के लिए भारतीय औसत समुद्र तल से संबंधित राष्ट्रीय ऊर्ध्वाधर आधार का उपयोग किया जाता है।
“भारत का औसत समुद्र तल केवल चेन्नई तट से मापा जाता है” कहना सही नहीं है। आधुनिक भारतीय ऊर्ध्वाधर आधार एक व्यापक भू-मापन व्यवस्था तथा विभिन्न समुद्री ज्वार प्रेक्षणों से संबंधित है।
⚠️ भ्रम से बचें
केवल चेन्नई = भारत का औसत समुद्र तल वाली एक-पंक्ति को प्रमाणित राष्ट्रीय तथ्य की तरह याद न करें।
भारत की समुद्री तटरेखा
Coastline of India
पुरानी पाठ्यपुस्तकों और लंबे समय तक प्रचलित सामान्य ज्ञान में भारत की कुल समुद्री तटरेखा, द्वीपों सहित, 7,516.6 किलोमीटर दी जाती रही है।
हाल के सरकारी पुनर्मापन के बाद भारत की तटरेखा की लंबाई 11,098.81 किलोमीटर बताई गई है। इसलिए परीक्षा में प्रश्न की पुस्तक, वर्ष और आधिकारिक अद्यतन को ध्यान में रखना आवश्यक है।
भारत की मुख्यभूमि की तटरेखा में गुजरात का तटीय विस्तार राज्यों में सर्वाधिक है।
पुरानी सामान्य ज्ञान पुस्तकों में गुजरात की तटरेखा लगभग 1,214.7 किलोमीटर लिखी मिलती है; तटरेखा के पुनर्मापन से राज्यवार लंबाइयों के आँकड़ों में भी परिवर्तन हो सकता है।
🎯 परीक्षा सावधानी
पुराना प्रचलित आँकड़ा — 7,516.6 किमी
नवीन सरकारी पुनर्मापन — 11,098.81 किमी
समुद्र तट वाले राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश
Coastal States & Union Territories
भारत के 9 राज्य समुद्री तटरेखा से जुड़े हैं — गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल।
समुद्री तट वाले केंद्रशासित प्रदेशों में पुदुच्चेरी, लक्षद्वीप, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह तथा दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव शामिल हैं।
पुराने नोट्स में दमन एवं दीव अलग केंद्रशासित प्रदेश के रूप में मिलता है। अब दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव को मिलाकर एक केंद्रशासित प्रदेश बनाया जा चुका है।
भारत के प्रमुख समुद्री तट
Important Coastal Regions
प्राचीन भारतीय साहित्यिक एवं ऐतिहासिक परंपराओं में रत्नाकर नाम का प्रयोग समुद्र के लिए मिलता है और सामान्य ज्ञान में इसे हिंद महासागर से जोड़ा जाता है।
कोरोमंडल तट मुख्यतः भारत के दक्षिण-पूर्वी तटीय मैदान से संबंधित है और इसका प्रमुख विस्तार तमिलनाडु तट पर है। इसका उत्तरी विस्तार आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तटीय क्षेत्र की ओर माना जाता है।
कन्याकुमारी को ऐतिहासिक रूप से केप कोमोरिन भी कहा जाता है।
कन्याकुमारी भारतीय मुख्यभूमि के अत्यंत दक्षिणी सिरे पर स्थित है, जबकि भारत का सबसे दक्षिणी बिंदु इंदिरा प्वाइंट ग्रेट निकोबार में स्थित है।
अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह
Andaman & Nicobar Islands
अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह बंगाल की खाड़ी और उससे जुड़े पूर्वी हिंद महासागरीय क्षेत्र में स्थित भारत का महत्वपूर्ण केंद्रशासित प्रदेश है।
पुरानी तथा व्यापक रूप से प्रयुक्त सरकारी एवं सामान्य ज्ञान सामग्री में अंडमान-निकोबार समूह में लगभग 572 द्वीप, टापू और शैल बताए जाते हैं।
10 डिग्री चैनल अंडमान द्वीप समूह और निकोबार द्वीप समूह को एक-दूसरे से अलग करता है।
सैडल पीक अंडमान द्वीप समूह की सर्वोच्च चोटी है। यह उत्तर अंडमान में स्थित है और इसकी ऊँचाई लगभग 732 मीटर है।
सैडल पीक को पूरे अंडमान-निकोबार समूह की सर्वोच्च चोटी कहना सही नहीं है। पूरे अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की सर्वोच्च चोटी माउंट थुलियर है, जो ग्रेट निकोबार में स्थित है और लगभग 642 मीटर ऊँची है।
⚠️ विशेष ध्यान
ऊँचाई के अनुसार 732 मीटर का सैडल पीक वास्तव में माउंट थुलियर से ऊँचा है; इसलिए सामान्य परीक्षा-स्रोतों में अंडमान-निकोबार की सर्वोच्च चोटी सैडल पीक ही दी जाती है। प्रश्न के शब्दों और निर्धारित स्रोत को ध्यान से पढ़ें।
बैरन द्वीप
Barren Island
बैरन द्वीप अंडमान सागर क्षेत्र में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के अंतर्गत स्थित है।
यह भारत का एकमात्र पुष्ट सक्रिय ज्वालामुखी है।
सामान्य परीक्षा-भूगोल में इसे बंगाल की खाड़ी के द्वीपीय क्षेत्र से संबंधित बताया जाता है।
लक्षद्वीप
Lakshadweep
लक्षद्वीप अरब सागर में स्थित भारत का केंद्रशासित द्वीप समूह है।
लक्षद्वीप के द्वीप मुख्यतः प्रवाल निर्मित हैं। यही कारण है कि यहाँ प्रवाल भित्तियाँ, एटोल और लैगून महत्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताएँ हैं।
लक्षद्वीप की राजधानी कवरत्ती है।
श्रीहरिकोटा एवं पुलीकट झील
Sriharikota Island
श्रीहरिकोटा आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र में पुलीकट झील और बंगाल की खाड़ी के बीच स्थित एक अवरोधक द्वीपीय भूभाग है।
यहीं सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र स्थित है, जो भारत का प्रमुख अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र है।
पुलीकट झील भारत की महत्वपूर्ण खारे पानी की लैगून झीलों में से एक है और इसका विस्तार आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु में है।
पंबन द्वीप एवं राम सेतु
Pamban Island & Adam’s Bridge
पंबन द्वीप, जिसे रामेश्वरम द्वीप भी कहा जाता है, तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी तट के निकट भारत और श्रीलंका के बीच स्थित है।
रामेश्वरम इसी द्वीप पर स्थित प्रमुख धार्मिक नगर है।
धनुष्कोडी पंबन द्वीप के दक्षिण-पूर्वी सिरे के निकट स्थित है।
भारत और श्रीलंका के बीच उथली चूना-पत्थरीय शृंखलाओं को राम सेतु या एडम्स ब्रिज कहा जाता है।
भारतीय ओर से इसकी शृंखला धनुष्कोडी-रामेश्वरम क्षेत्र से श्रीलंका के मन्नार द्वीप की दिशा में फैली हुई है।
कोरी क्रीक एवं सर क्रीक
Creeks of Kachchh
कोरी क्रीक गुजरात के कच्छ क्षेत्र में स्थित है और कच्छ के रण से संबंधित ज्वारीय खाड़ी क्षेत्र का भाग है।
सर क्रीक कच्छ के रण के दलदली क्षेत्र में स्थित लगभग संकीर्ण ज्वारीय मुहाना है।
सर क्रीक क्षेत्र भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री सीमा निर्धारण से संबंधित विवाद का महत्वपूर्ण विषय रहा है।
महत्वपूर्ण तथ्य — त्वरित तालिका
Rapid Revision Table
| तथ्य | सही उत्तर |
|---|---|
| हिमालय की सबसे ऊँची मुख्य श्रेणी | हिमाद्रि या बृहत हिमालय |
| हिमालय की नवीनतम मुख्य श्रेणी | शिवालिक |
| बृहत हिमालय और शिवालिक के बीच | लघु हिमालय |
| नर्मदा और ताप्ती के बीच | सतपुड़ा |
| भारत की प्राचीनतम पर्वत श्रेणी | अरावली |
| अरावली की सर्वोच्च चोटी | गुरु शिखर |
| दक्षिण भारत की सर्वोच्च चोटी | अनाईमुडी |
| नीलगिरि और अनामलाई के बीच | पालघाट दर्रा |
| नेपाल में एवरेस्ट का नाम | सागरमाथा |
| उत्तराखंड की प्रसिद्ध चोटी | नंदा देवी |
| सिक्किम का प्रसिद्ध दर्रा | नाथू ला |
| हिमाचल प्रदेश का प्रसिद्ध दर्रा | रोहतांग |
| केदारनाथ के निकट हिमनद | चोराबाड़ी हिमनद |
| अंडमान और निकोबार को अलग करने वाला चैनल | 10 डिग्री चैनल |
| भारत का सक्रिय ज्वालामुखी | बैरन द्वीप |
| प्रवाल निर्मित द्वीप समूह | लक्षद्वीप |
| भारत-पाकिस्तान से संबंधित क्रीक विवाद | सर क्रीक |
सबसे अधिक भ्रम वाले तथ्य
Important Clarifications
नीलगिरि — केवल तमिलनाडु और केरल नहीं; कर्नाटक का क्षेत्र भी इससे जुड़ा है।
कोंकण — पश्चिमी घाट का नाम नहीं, बल्कि पश्चिमी तटीय मैदान का एक भाग है।
राकापोशी — लद्दाख पर्वत श्रेणी में नहीं, काराकोरम क्षेत्र में स्थित है।
अराकान योमा — हिमाद्रि, हिमाचल या शिवालिक जैसी मुख्य हिमालयी श्रेणी नहीं; पूर्वी वलित पर्वतीय प्रणाली का आगे का विस्तार है।
बुर्जिल और बनिहाल — दोनों को पीर पंजाल में रखना सही नहीं है। बनिहाल पीर पंजाल से संबंधित है।
भारत का औसत समुद्र तल — केवल चेन्नई तट से मापा जाता है, यह कथन सुरक्षित नहीं है।
भारत की तटरेखा — 7,516.6 किमी पुराना बहुप्रचलित आँकड़ा है; नवीन सरकारी पुनर्मापन में 11,098.81 किमी दिया गया है।
दमन एवं दीव अब अलग केंद्रशासित प्रदेश नहीं है; यह दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव नामक संयुक्त केंद्रशासित प्रदेश का हिस्सा है।
⚡ अंतिम त्वरित पुनरावृत्ति
हिमाद्रि — हिमालय की सबसे ऊँची मुख्य श्रेणी।
शिवालिक — हिमालय की सबसे नवीन और दक्षिणी श्रेणी।
लघु हिमालय — हिमाद्रि और शिवालिक के बीच।
अरावली — भारत की प्राचीनतम पर्वत श्रेणियों में प्रमुख; गुरु शिखर इसकी सर्वोच्च चोटी।
सतपुड़ा — नर्मदा और ताप्ती के मध्य।
अनाईमुडी — दक्षिण भारत की सर्वोच्च चोटी।
पालघाट — नीलगिरि और अनामलाई के बीच।
एवरेस्ट — नेपाल में सागरमाथा।
नंदा देवी — उत्तराखंड।
नाथू ला — सिक्किम।
माना, नीति और लिपुलेख — उत्तराखंड।
रोहतांग — हिमाचल प्रदेश।
सियाचिन — काराकोरम क्षेत्र का विशाल हिमनद।
चोराबाड़ी हिमनद — केदारनाथ क्षेत्र, उत्तराखंड।
गुजरात — भारत के राज्यों में सर्वाधिक तटीय विस्तार वाला राज्य।
अंडमान-निकोबार — बंगाल की खाड़ी क्षेत्र; 10 डिग्री चैनल अंडमान और निकोबार को अलग करता है।
बैरन द्वीप — भारत का सक्रिय ज्वालामुखी।
लक्षद्वीप — अरब सागर में स्थित प्रवाल निर्मित द्वीप समूह।
पंबन द्वीप — रामेश्वरम; भारत और श्रीलंका के बीच का महत्वपूर्ण द्वीपीय क्षेत्र।
सर क्रीक — भारत-पाकिस्तान सीमा विवाद से संबंधित ज्वारीय क्रीक।