इस्लाम धर्म
पैगंबर मुहम्मद, कुरान, हिजरत, खलीफा एवं इस्लामी परंपराएँ
पैगंबर मुहम्मद
जन्म एवं परिवार
इस्लाम धर्म के ऐतिहासिक प्रवर्तक पैगंबर मुहम्मद थे।
उनका जन्म लगभग 570 ईस्वी में मक्का नगर में कुरैश कबीले में हुआ।
उनके पिता का नाम अब्दुल्लाह और माता का नाम आमिना था।
माता-पिता की मृत्यु के बाद उनकी देखभाल पहले दादा अब्दुल मुत्तलिब और बाद में चाचा अबू तालिब ने की।
लगभग 25 वर्ष की आयु में उन्होंने खदीजा से विवाह किया।
उनकी पुत्री फातिमा और दामाद अली इस्लामी इतिहास में महत्वपूर्ण हैं।
प्रथम वह्य और हिजरत
610 एवं 622 ईस्वी
इस्लामी परंपरा के अनुसार 610 ईस्वी में मक्का के निकट हिरा की गुफा में पैगंबर मुहम्मद को प्रथम वह्य प्राप्त हुई।
इस्लामी परंपरा में जिब्रील को वह्य पहुँचाने वाला फरिश्ता माना जाता है।
मक्का में विरोध बढ़ने के बाद 622 ईस्वी में उन्होंने मक्का से मदीना की ओर प्रस्थान किया।
इस घटना को हिजरत कहा जाता है।
हिजरी संवत का प्रारंभ इसी हिजरत से माना जाता है।
परीक्षा बिंदु
प्रथम वह्य — 610 ईस्वी, हिरा की गुफा।
हिजरत — 622 ईस्वी, मक्का से मदीना।
मक्का और मदीना
इस्लाम के दो महत्वपूर्ण नगर
मक्का इस्लामी परंपरा का सबसे पवित्र नगर माना जाता है। यहीं काबा स्थित है।
पैगंबर मुहम्मद का जन्म भी मक्का में हुआ था।
मदीना वह नगर है जहाँ पैगंबर मुहम्मद ने 622 ईस्वी में हिजरत की।
मदीना का पुराना नाम यथ्रिब था।
पैगंबर मुहम्मद की मृत्यु भी मदीना में हुई और उन्हें वहीं दफनाया गया।
कुरान
इस्लाम का पवित्र ग्रंथ
कुरान इस्लाम धर्म का पवित्र ग्रंथ है। इसका मूल पाठ अरबी भाषा में है।
कुरान में कुल 114 सूरह हैं।
आयतों की संख्या गणना-पद्धति के अनुसार कुछ भिन्न मिलती है। प्रचलित एक प्रमुख गणना में 6236 आयतें मानी जाती हैं।
कुरान की प्रत्येक अध्याय-सदृश इकाई को सूरह और उसके पदों को आयत कहा जाता है।
इस्लाम के पाँच प्रमुख धार्मिक कर्तव्य
आस्था और आचरण
इस्लामी परंपरा में ईमान/शहादा, नमाज, जकात, रोजा और हज को अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक कर्तव्यों में गिना जाता है।
शहादा अल्लाह की एकता और मुहम्मद को उसके रसूल के रूप में स्वीकार करने की आस्था से संबंधित है।
नमाज नियमित प्रार्थना है।
जकात संपत्ति का निर्धारित भाग जरूरतमंदों के लिए देना है।
रोजा रमजान के महीने में उपवास से संबंधित है।
हज मक्का की धार्मिक तीर्थयात्रा है, जिसे समर्थ मुसलमान के लिए जीवन में एक बार करना धार्मिक कर्तव्य माना जाता है।
काबा और किबला
नमाज की दिशा
मुसलमान नमाज के समय मक्का स्थित काबा की दिशा की ओर मुख करते हैं।
इस दिशा को किबला कहा जाता है।
भारत से मक्का सामान्यतः पश्चिम की ओर स्थित है।
काबा मस्जिद अल-हरम के परिसर में स्थित है।
याद रखें
किबला — नमाज की दिशा।
किबला की दिशा — मक्का स्थित काबा की ओर।
पैगंबर की मृत्यु
632 ईस्वी
पैगंबर मुहम्मद की मृत्यु 632 ईस्वी में मदीना में हुई। उन्हें वहीं दफनाया गया।
उनके बाद मुस्लिम समुदाय के नेतृत्व से जुड़ा पद खलीफा कहलाया।
चार राशिदून खलीफा
प्रारंभिक खिलाफत
पैगंबर मुहम्मद की मृत्यु के बाद प्रारंभिक मुस्लिम समुदाय के पहले चार खलीफाओं को सुन्नी परंपरा में राशिदून या सही मार्गदर्शित खलीफा कहा जाता है।
इनका क्रम था — अबू बक्र, उमर, उस्मान और अली।
अबू बक्र पहले खलीफा थे।
अली चौथे खलीफा थे और पैगंबर मुहम्मद के दामाद भी थे।
क्रम
अबू बक्र → उमर → उस्मान → अली
सुन्नी और शिया परंपराएँ
उत्तराधिकार और नेतृत्व
पैगंबर मुहम्मद की मृत्यु के बाद मुस्लिम समुदाय में नेतृत्व के प्रश्न पर मतभेद विकसित हुए। आगे चलकर इसी ऐतिहासिक प्रक्रिया से सुन्नी और शिया परंपराएँ विकसित हुईं।
सुन्नी परंपरा कुरान के साथ पैगंबर की सुन्नत अर्थात कथनों और आचरण को विशेष महत्व देती है।
शिया परंपरा में अली और पैगंबर के परिवार से आने वाले इमामों को विशेष धार्मिक नेतृत्व प्रदान किया जाता है।
अली की हत्या 661 ईस्वी में हुई।
उनके पुत्र हुसैन 680 ईस्वी में इराक के कर्बला में मारे गए।
कर्बला और मुहर्रम
हुसैन की शहादत
कर्बला वर्तमान इराक में स्थित है।
680 ईस्वी में हुसैन इब्न अली और उनके साथियों की कर्बला में मृत्यु हुई।
इस घटना का शिया इस्लामी परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थान है।
मुहर्रम के दौरान विशेष रूप से आशूरा के दिन कर्बला की घटना और हुसैन की शहादत को याद किया जाता है।
सुन्नत और हदीस
पैगंबर की परंपरा
सुन्नत से आशय पैगंबर मुहम्मद के आदर्श आचरण और परंपरा से है।
हदीस पैगंबर मुहम्मद से संबंधित कथनों, कार्यों और अनुमोदनों की परंपरागत रिपोर्टों को कहा जाता है।
कुरान के बाद इस्लामी धार्मिक और विधिक परंपराओं को समझने में हदीस और सुन्नत का महत्वपूर्ण स्थान है।
खिलाफत
इस्लामी राजनीतिक नेतृत्व
इस्लामी इतिहास में विभिन्न राजवंशों के शासकों ने खलीफा की उपाधि धारण की।
प्रारंभिक राशिदून खिलाफत के बाद उमय्यद और अब्बासी खिलाफतें विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहीं।
बाद के इतिहास में ओटोमन शासकों ने भी खलीफा की उपाधि धारण की।
ओटोमन खिलाफत का औपचारिक अंत 1924 ईस्वी में तुर्की की राष्ट्रीय सभा द्वारा किया गया।
मुस्तफा कमाल अतातुर्क के नेतृत्व वाले तुर्की गणराज्य के सुधारों के दौरान यह परिवर्तन हुआ।
पैगंबर मुहम्मद की जीवनी
इब्न इसहाक और इब्न हिशाम
इब्न इसहाक ने पैगंबर मुहम्मद की सबसे प्रारंभिक प्रसिद्ध जीवनी तैयार की।
उसका मूल पाठ पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं है। उसकी सामग्री मुख्यतः इब्न हिशाम के संपादित रूप से ज्ञात होती है।
पैगंबर मुहम्मद के जीवन से संबंधित जीवनी साहित्य को सामान्यतः सीरत परंपरा से जोड़ा जाता है।
मिलाद-उन-नबी
पैगंबर के जन्म की स्मृति
पैगंबर मुहम्मद के जन्म की स्मृति में कई मुस्लिम समुदाय मिलाद-उन-नबी मनाते हैं।
इसे विभिन्न क्षेत्रों में मौलिद या अन्य स्थानीय नामों से भी जाना जाता है।
इसके पालन की धार्मिक परंपरा और स्वरूप विभिन्न मुस्लिम समुदायों में अलग-अलग हो सकता है।
रमजान और ईद-उल-फितर
रोजा और पर्व
रमजान इस्लामी चंद्र कैलेंडर का नौवाँ महीना है।
इस महीने में समर्थ वयस्क मुसलमान भोर से सूर्यास्त तक रोजा रखते हैं।
रमजान की समाप्ति पर ईद-उल-फितर मनाई जाती है।
हज और ईद-उल-अजहा
मक्का की तीर्थयात्रा
हज मक्का की वार्षिक इस्लामी तीर्थयात्रा है।
यह इस्लाम के प्रमुख धार्मिक कर्तव्यों में से एक है।
हज इस्लामी कैलेंडर के जिलहिज्जा महीने में किया जाता है।
ईद-उल-अजहा का संबंध पैगंबर इब्राहीम की आज्ञाकारिता और बलिदान की धार्मिक परंपरा से है।
इस्लामी कैलेंडर
हिजरी संवत
इस्लामी कैलेंडर को हिजरी कैलेंडर कहा जाता है।
इसका प्रारंभ 622 ईस्वी की हिजरत से माना जाता है।
यह चंद्र कैलेंडर है और इसमें 12 महीने होते हैं।
इस कारण इस्लामी वर्ष सौर वर्ष से लगभग 10–11 दिन छोटा होता है।
भारत में इस्लाम का प्रारंभिक संपर्क
अरब समुद्री व्यापार
भारत के पश्चिमी समुद्रतट पर अरब व्यापारी इस्लाम के प्रारंभिक काल से ही आते रहे।
इस प्रकार भारत में इस्लाम का प्रारंभिक संपर्क समुद्री व्यापार के माध्यम से हुआ।
पश्चिमी तट, विशेषकर मालाबार तट, अरब व्यापारियों और भारतीय बंदरगाहों के संपर्क का महत्वपूर्ण क्षेत्र था।
सिंध पर अरब विजय
मुहम्मद बिन कासिम
712 ईस्वी में मुहम्मद बिन कासिम के नेतृत्व में अरब सेना ने सिंध पर विजय प्राप्त की।
इसके बाद सिंध के कुछ क्षेत्रों में अरब शासन स्थापित हुआ।
उस समय सिंध के शासक राजा दाहिर थे।
सिंध विजय से संबंधित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कथात्मक स्रोतों में चचनामा का उल्लेख किया जाता है।
बहुत महत्वपूर्ण
712 ईस्वी — मुहम्मद बिन कासिम का सिंध अभियान।
सिंध का शासक — दाहिर।
सूफी परंपरा
आध्यात्मिक और रहस्यवादी धारा
इस्लामी दुनिया में विकसित आध्यात्मिक और रहस्यवादी परंपराओं को व्यापक रूप से सूफी परंपरा से जोड़ा जाता है।
सूफी परंपराओं में ईश्वर-प्रेम, आध्यात्मिक साधना, गुरु-शिष्य संबंध और नैतिक जीवन को विशेष महत्व मिला।
सूफी गुरु को शेख या पीर और शिष्य को मुरीद कहा जाता है।
सूफी सिलसिलों ने मध्यकालीन भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन पर गहरा प्रभाव डाला।
भारत के प्रमुख सूफी सिलसिले
चिश्ती और सुहरावर्दी
मध्यकालीन भारत में अनेक सूफी सिलसिले सक्रिय रहे। इनमें चिश्ती और सुहरावर्दी विशेष रूप से महत्वपूर्ण थे।
भारत में चिश्ती परंपरा से जुड़े सबसे प्रसिद्ध संतों में ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती का नाम प्रमुख है। उनकी दरगाह अजमेर में स्थित है।
कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी, बाबा फरीद और निजामुद्दीन औलिया भी चिश्ती परंपरा के प्रसिद्ध सूफी संतों में गिने जाते हैं।
निजामुद्दीन औलिया का प्रमुख केंद्र दिल्ली था।
इस्लाम धर्म — अंतिम परीक्षा पुनरावृत्ति
इस्लाम के ऐतिहासिक प्रवर्तक — पैगंबर मुहम्मद।
जन्म — लगभग 570 ईस्वी, मक्का।
कबीला — कुरैश।
पिता — अब्दुल्लाह; माता — आमिना।
पत्नी — खदीजा।
पुत्री — फातिमा; दामाद — अली।
प्रथम वह्य — 610 ईस्वी, हिरा की गुफा।
हिजरत — 622 ईस्वी, मक्का से मदीना।
हिजरी संवत का आधार — हिजरत।
मदीना का पुराना नाम — यथ्रिब।
इस्लाम का पवित्र ग्रंथ — कुरान।
कुरान की भाषा — अरबी।
कुरान में सूरह — 114।
नमाज की दिशा — किबला।
किबला — मक्का स्थित काबा की दिशा।
पैगंबर मुहम्मद की मृत्यु — 632 ईस्वी, मदीना।
पहले चार खलीफा — अबू बक्र, उमर, उस्मान और अली।
अली की हत्या — 661 ईस्वी।
हुसैन की मृत्यु — 680 ईस्वी, कर्बला।
सुन्नत — पैगंबर का आदर्श आचरण।
हदीस — पैगंबर से संबंधित कथन और आचरण की रिपोर्टें।
ओटोमन खिलाफत का अंत — 1924 ईस्वी।
पैगंबर की प्रारंभिक प्रसिद्ध जीवनी — इब्न इसहाक।
इब्न इसहाक की सामग्री का प्रमुख सुरक्षित संपादित रूप — इब्न हिशाम।
भारत में इस्लाम का प्रारंभिक संपर्क — अरब समुद्री व्यापार।
सिंध विजय — 712 ईस्वी, मुहम्मद बिन कासिम।
सिंध का शासक — दाहिर।
भारत में प्रमुख सूफी सिलसिला — चिश्ती।
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती — अजमेर।
निजामुद्दीन औलिया — दिल्ली।