भारत में बैंकिंग व्यवस्था
बैंकिंग का विकास, राष्ट्रीयकरण, बैंक विलय और भारतीय रिजर्व बैंक
भारतीय बैंकिंग व्यवस्था
भारत की आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था का विकास औपनिवेशिक काल के प्रेसीडेंसी बैंकों से शुरू होकर इंपीरियल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, बैंक राष्ट्रीयकरण, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी बैंक तथा भारतीय रिजर्व बैंक जैसी संस्थाओं तक हुआ। स्वतंत्रता के बाद बैंकिंग का विस्तार केवल व्यापारिक केंद्रों तक सीमित न रखकर ग्रामीण क्षेत्रों, कृषि, लघु उद्योग और कमजोर वर्गों तक पहुँचाने पर विशेष जोर दिया गया।
प्रेसीडेंसी बैंकों का विकास
ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में तीन प्रमुख प्रेसीडेंसी बैंक स्थापित हुए।
बैंक ऑफ कलकत्ता की स्थापना 1806 में हुई। बाद में 1809 में इसका नाम बैंक ऑफ बंगाल कर दिया गया। इसलिए “बैंक ऑफ बंगाल की स्थापना 1806” सामान्य परीक्षा पुस्तकों में मिलता है, लेकिन अधिक सटीक तथ्य यह है कि 1806 में बैंक ऑफ कलकत्ता स्थापित हुआ था।
बैंक ऑफ बॉम्बे की स्थापना 1840 और बैंक ऑफ मद्रास की स्थापना 1843 में हुई।
1921 में इन तीनों प्रेसीडेंसी बैंकों को मिलाकर इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना की गई।
🎯 क्रम याद रखें
इंपीरियल बैंक से भारतीय स्टेट बैंक
स्वतंत्रता के बाद ग्रामीण क्षेत्रों तक बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार करने की आवश्यकता महसूस की गई।
अखिल भारतीय ग्रामीण साख सर्वेक्षण समिति की सिफारिशों के बाद इंपीरियल बैंक के पुनर्गठन का निर्णय लिया गया।
भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 के अंतर्गत इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया का अधिग्रहण किया गया और 1 जुलाई 1955 को भारतीय स्टेट बैंक अस्तित्व में आया।
इसलिए सामान्य भाषा में इसे इंपीरियल बैंक का “राष्ट्रीयकरण” कहा जाता है, लेकिन अधिक सटीक रूप में इसे संसद के कानून द्वारा अधिग्रहण और भारतीय स्टेट बैंक में परिवर्तन समझना चाहिए।
🎯 महत्वपूर्ण
इंपीरियल बैंक → 1 जुलाई 1955 → भारतीय स्टेट बैंक
भारतीयों द्वारा स्थापित प्रमुख बैंक
भारतीय प्रबंधन वाले प्रारंभिक वाणिज्यिक बैंकों में अवध कमर्शियल बैंक का विशेष स्थान है। इसकी स्थापना 1881 में हुई और इसे सामान्यतः भारतीय प्रबंधन वाला प्रारंभिक वाणिज्यिक बैंक माना जाता है।
पंजाब नेशनल बैंक की स्थापना 1894 में हुई और इसने 1895 में अपना बैंकिंग कारोबार शुरू किया।
बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना 1906, बैंक ऑफ बड़ौदा की स्थापना 1908 तथा सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना 1911 में हुई।
बैंक ऑफ मैसूर की स्थापना 1913 में हुई। आगे चलकर यह स्टेट बैंक ऑफ मैसूर बना और अंततः भारतीय स्टेट बैंक में विलय हो गया।
बैंकिंग नियमन का विकास
बीसवीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों में भारत में अनेक बैंक विफल हुए। विशेष रूप से प्रथम विश्व युद्ध के आसपास बैंकिंग संकट और बैंक विफलताओं ने मजबूत नियामक व्यवस्था की आवश्यकता स्पष्ट की।
लेकिन यह कहना कि 1913–17 के बैंकिंग संकट के तुरंत बाद बैंकिंग नियमन अधिनियम, 1949 बना अधूरा है, क्योंकि दोनों के बीच लंबा संस्थागत विकास हुआ और 1935 में भारतीय रिजर्व बैंक भी अस्तित्व में आ चुका था।
बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 ने भारत में बैंकिंग कंपनियों के संचालन, लाइसेंसिंग, प्रबंधन और नियमन के लिए व्यापक कानूनी ढाँचा प्रदान किया।
भारतीय स्टेट बैंक के सहयोगी बैंक
भारतीय स्टेट बैंक (सहायक बैंक) अधिनियम, 1959 के माध्यम से पूर्व रियासती बैंकों को भारतीय स्टेट बैंक से जोड़ने की व्यवस्था की गई।
समय के साथ भारतीय स्टेट बैंक समूह से संबंधित प्रमुख सहयोगी बैंकों में निम्न नाम परीक्षा में विशेष रूप से मिलते हैं—
1. स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर
2. स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद
3. स्टेट बैंक ऑफ इंदौर
4. स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र
5. स्टेट बैंक ऑफ मैसूर
6. स्टेट बैंक ऑफ पटियाला
7. स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर
स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र का भारतीय स्टेट बैंक में विलय 2008 में और स्टेट बैंक ऑफ इंदौर का विलय 2010 में हो गया।
2017 का भारतीय स्टेट बैंक महाविलय
भारतीय स्टेट बैंक के शेष पाँच सहयोगी बैंकों का विलय 1 अप्रैल 2017 से भारतीय स्टेट बैंक में प्रभावी हुआ।
ये पाँच बैंक थे—
स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर
स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद
स्टेट बैंक ऑफ मैसूर
स्टेट बैंक ऑफ पटियाला
स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर
इसी तारीख से भारतीय महिला बैंक का भी भारतीय स्टेट बैंक में विलय हुआ।
🎯 परीक्षा तथ्य
1 अप्रैल 2017 = पाँच सहयोगी बैंक + भारतीय महिला बैंक → भारतीय स्टेट बैंक
बैंकों का प्रथम व्यापक राष्ट्रीयकरण — 1969
19 जुलाई 1969 को भारत सरकार ने देश के 14 बड़े निजी वाणिज्यिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया।
इन बैंकों में उस समय ₹50 करोड़ या उससे अधिक जमा वाले प्रमुख बैंक शामिल थे।
इस कदम का उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं को बड़े उद्योगों और शहरों से आगे ग्रामीण क्षेत्रों, कृषि, छोटे उद्योगों और समाज के कमजोर वर्गों तक पहुँचाना था।
राष्ट्रीयकरण के बाद शाखा विस्तार, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण और ग्रामीण बैंकिंग में तेजी आई।
1969 में राष्ट्रीयकृत 14 बैंक
| क्रम | बैंक |
|---|---|
| 1 | इलाहाबाद बैंक |
| 2 | बैंक ऑफ बड़ौदा |
| 3 | बैंक ऑफ इंडिया |
| 4 | बैंक ऑफ महाराष्ट्र |
| 5 | केनरा बैंक |
| 6 | सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया |
| 7 | देना बैंक |
| 8 | इंडियन बैंक |
| 9 | इंडियन ओवरसीज बैंक |
| 10 | पंजाब नेशनल बैंक |
| 11 | सिंडिकेट बैंक |
| 12 | यूको बैंक |
| 13 | यूनियन बैंक ऑफ इंडिया |
| 14 | यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया |
दूसरा बैंक राष्ट्रीयकरण — 1980
15 अप्रैल 1980 को भारत सरकार ने छह और निजी क्षेत्र के बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया।
इन बैंकों की जमा राशि ₹200 करोड़ से अधिक थी।
राष्ट्रीयकृत छह बैंक थे—
1. आंध्रा बैंक
2. कॉरपोरेशन बैंक
3. न्यू बैंक ऑफ इंडिया
4. ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स
5. पंजाब एंड सिंध बैंक
6. विजया बैंक
इसके बाद राष्ट्रीयकृत बैंकों की संख्या 20 हो गई।
न्यू बैंक ऑफ इंडिया का विलय
1993 में न्यू बैंक ऑफ इंडिया का पंजाब नेशनल बैंक में विलय कर दिया गया।
इसके परिणामस्वरूप उस समय राष्ट्रीयकृत बैंकों की संख्या 20 से घटकर 19 हो गई।
यह भारत में किसी राष्ट्रीयकृत बैंक के दूसरे राष्ट्रीयकृत बैंक में विलय का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
वर्तमान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक
पुरानी पुस्तकों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या 21 लिखी मिलती है—19 राष्ट्रीयकृत बैंक, भारतीय स्टेट बैंक और आईडीबीआई बैंक।
यह संख्या अब वर्तमान नहीं है।
आईडीबीआई बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक ने 21 जनवरी 2019 से नियामकीय उद्देश्यों के लिए निजी क्षेत्र के बैंक के रूप में वर्गीकृत किया।
विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलयों के बाद वर्तमान में भारत में 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक हैं।
⚠️ पुराना तथ्य
21 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक वाला आँकड़ा अब सही नहीं है। वर्तमान संख्या 12 है।
वर्तमान 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक
| क्रम | बैंक |
|---|---|
| 1 | भारतीय स्टेट बैंक |
| 2 | बैंक ऑफ बड़ौदा |
| 3 | बैंक ऑफ इंडिया |
| 4 | बैंक ऑफ महाराष्ट्र |
| 5 | केनरा बैंक |
| 6 | सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया |
| 7 | इंडियन बैंक |
| 8 | इंडियन ओवरसीज बैंक |
| 9 | पंजाब नेशनल बैंक |
| 10 | पंजाब एंड सिंध बैंक |
| 11 | यूको बैंक |
| 12 | यूनियन बैंक ऑफ इंडिया |
बैंक ऑफ बड़ौदा का महाविलय
देना बैंक और विजया बैंक के बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय का निर्णय 2018-19 के दौरान लिया गया।
लेकिन वास्तविक विलय 1 अप्रैल 2019 से प्रभावी हुआ।
इसलिए “अप्रैल 2018 में देना बैंक और विजया बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय हुआ” सही नहीं है।
🎯 सही तारीख
देना बैंक + विजया बैंक → बैंक ऑफ बड़ौदा → 1 अप्रैल 2019
2020 का सार्वजनिक बैंक महाविलय
अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों को चार बड़े बैंकों में समाहित करने की घोषणा की।
ये विलय 1 अप्रैल 2020 से प्रभावी हुए।
इस प्रक्रिया के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या और कम होकर 12 रह गई।
2020 के चार प्रमुख विलय
| विलय होने वाले बैंक | जिस बैंक में विलय हुआ |
|---|---|
| सिंडिकेट बैंक | केनरा बैंक |
| आंध्रा बैंक + कॉरपोरेशन बैंक | यूनियन बैंक ऑफ इंडिया |
| ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स + यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया | पंजाब नेशनल बैंक |
| इलाहाबाद बैंक | इंडियन बैंक |
🎯 महत्वपूर्ण
इन विलयों की घोषणा 2019 में हुई, लेकिन विलय 1 अप्रैल 2020 से प्रभावी हुए।
भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना
भारतीय रिजर्व बैंक भारत का केंद्रीय बैंक है।
इसकी स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के अंतर्गत की गई और इसने 1 अप्रैल 1935 से कार्य करना शुरू किया।
स्थापना के समय यह शेयरधारकों के स्वामित्व वाली संस्था थी।
इसका राष्ट्रीयकरण 1 जनवरी 1949 को किया गया।
भारतीय रिजर्व बैंक का केंद्रीय कार्यालय प्रारंभ में कलकत्ता में स्थापित हुआ था, जिसे 1937 में स्थायी रूप से मुंबई स्थानांतरित कर दिया गया।
रिजर्व बैंक के गवर्नर
भारतीय रिजर्व बैंक के प्रथम गवर्नर सर ऑसबोर्न स्मिथ थे। उनका कार्यकाल 1935 से 1937 तक रहा।
भारतीय रिजर्व बैंक के प्रथम भारतीय गवर्नर सर सी. डी. देशमुख थे।
वे 1943 से 1949 तक गवर्नर रहे और 15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता के समय भी वही रिजर्व बैंक के गवर्नर थे।
पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास का कार्यकाल दिसंबर 2024 में समाप्त हुआ।
वर्तमान में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा हैं।
🎯 सीधा प्रश्न
प्रथम गवर्नर — सर ऑसबोर्न स्मिथ
प्रथम भारतीय गवर्नर — सी. डी. देशमुख
वर्तमान गवर्नर — संजय मल्होत्रा
रिजर्व बैंक का मुख्यालय
भारतीय रिजर्व बैंक का केंद्रीय कार्यालय मुंबई में स्थित है।
रिजर्व बैंक देश के विभिन्न भागों में अपने क्षेत्रीय कार्यालयों और अन्य कार्यालयों के माध्यम से कार्य करता है।
नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई रिजर्व बैंक के महत्वपूर्ण कार्यालय केंद्रों में शामिल हैं।
पुरानी पुस्तकों में इन्हें “स्थानीय प्रधान कार्यालय” कहने की शब्दावली मिल सकती है, लेकिन वर्तमान संगठनात्मक संरचना में रिजर्व बैंक के अनेक क्षेत्रीय कार्यालय हैं।
रिजर्व बैंक के प्रमुख कार्य
भारतीय रिजर्व बैंक के कार्यों को व्यापक रूप से केंद्रीय बैंकिंग एवं नियामक कार्य तथा विकासात्मक और वित्तीय स्थिरता संबंधी कार्यों में समझा जा सकता है।
इसके प्रमुख कार्यों में मुद्रा निर्गमन, मौद्रिक नीति, सरकार के बैंकर का कार्य, बैंकों का बैंक, विदेशी मुद्रा भंडार का प्रबंधन, बैंकिंग नियमन, भुगतान एवं निपटान व्यवस्था और वित्तीय स्थिरता शामिल हैं।
करेंसी नोटों का निर्गमन
भारत में अधिकांश बैंक नोटों के निर्गमन का अधिकार भारतीय रिजर्व बैंक के पास है।
लेकिन ₹1 का नोट भारत सरकार द्वारा जारी किया जाता है। इसलिए यह कहना कि देश के प्रत्येक करेंसी नोट को रिजर्व बैंक ही जारी करता है, सही नहीं है।
₹1 का नोट भारत सरकार की देयता है, जबकि अन्य रिजर्व बैंक नोट भारतीय रिजर्व बैंक की देयता होते हैं।
भारत में नोट निर्गमन के लिए न्यूनतम आरक्षित प्रणाली लागू है।
इस व्यवस्था के तहत रिजर्व बैंक के निर्गमन विभाग के पास स्वर्ण सिक्के, स्वर्ण धातु और विदेशी प्रतिभूतियों का कुल न्यूनतम मूल्य ₹200 करोड़ होना चाहिए।
इसमें स्वर्ण का न्यूनतम मूल्य ₹115 करोड़ होना आवश्यक है। इस कारण पुराने नोट्स में ₹115 करोड़ सोना और ₹85 करोड़ विदेशी प्रतिभूतियाँ लिखा मिलता है, लेकिन कानून वास्तव में विदेशी प्रतिभूतियों को अलग से ठीक ₹85 करोड़ रखने की बाध्यता नहीं बताता; ₹200 करोड़ की कुल न्यूनतम राशि में कम-से-कम ₹115 करोड़ स्वर्ण होना आवश्यक है।
⚠️ महत्वपूर्ण सुधार
सही: कुल स्वर्ण + विदेशी प्रतिभूतियाँ कम-से-कम ₹200 करोड़, जिसमें स्वर्ण कम-से-कम ₹115 करोड़।
अति-सरलीकरण: “₹115 करोड़ सोना + अनिवार्य ₹85 करोड़ विदेशी प्रतिभूतियाँ”।
सरकार का बैंकर, एजेंट और सलाहकार
भारतीय रिजर्व बैंक केंद्र सरकार का बैंकर, एजेंट और वित्तीय सलाहकार है।
यह सरकार के खाते संचालित करता है तथा सरकारी प्राप्तियों और भुगतानों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
रिजर्व बैंक सरकारी प्रतिभूतियों और ट्रेजरी बिलों से संबंधित ऋण प्रबंधन कार्य भी करता है।
यह सरकार को आर्थिक, मौद्रिक और वित्तीय विषयों पर आवश्यक सलाह देता है।
राज्य सरकारों के लिए भी रिजर्व बैंक समझौते और संबंधित वैधानिक व्यवस्था के अनुसार बैंकिंग कार्य करता है।
बैंकों का बैंक
भारतीय रिजर्व बैंक को बैंकों का बैंक कहा जाता है क्योंकि अनुसूचित बैंकों के रिजर्व खाते रिजर्व बैंक के पास रहते हैं और बैंकिंग प्रणाली की अंतिम तरलता व्यवस्था में रिजर्व बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
नकदी की आवश्यकता होने पर पात्र बैंकों को रिजर्व बैंक निर्धारित सुविधाओं और प्रतिभूतियों के आधार पर धन उपलब्ध करा सकता है।
नकद आरक्षित अनुपात के अंतर्गत बैंकों को अपनी शुद्ध मांग और समय देयताओं का निर्धारित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास नकद रूप में रखना पड़ता है।
लेकिन वैधानिक तरलता अनुपात की राशि रिजर्व बैंक के पास जमा नहीं की जाती। बैंकों को निर्धारित तरल परिसंपत्तियाँ स्वयं बनाए रखनी होती हैं।
🎯 बहुत महत्वपूर्ण अंतर
नकद आरक्षित अनुपात → रिजर्व बैंक के पास नकद
वैधानिक तरलता अनुपात → बैंक स्वयं तरल परिसंपत्तियों के रूप में बनाए रखता है
विदेशी विनिमय प्रबंधन
भारतीय रिजर्व बैंक भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विदेशी मुद्रा संबंधी वर्तमान प्रमुख कानूनी व्यवस्था विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 है, जो 1 जून 2000 से प्रभावी हुआ।
रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा बाजार के व्यवस्थित विकास, बाह्य भुगतान व्यवस्था और विदेशी विनिमय प्रबंधन से संबंधित नियमों तथा निर्देशों को लागू करता है।
विदेशी विनिमय दर भारत में मुख्यतः बाजार शक्तियों से निर्धारित होती है। रिजर्व बैंक आवश्यकता पड़ने पर अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है।
इसलिए रिजर्व बैंक का उद्देश्य किसी एक निश्चित विनिमय दर को हमेशा स्थिर रखना नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित परिस्थितियाँ बनाए रखना है।
मौद्रिक नीति एवं साख नियंत्रण
भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति के माध्यम से अर्थव्यवस्था में मुद्रा, ब्याज दर और तरलता की परिस्थितियों को प्रभावित करता है।
इसका प्रमुख उद्देश्य मूल्य स्थिरता बनाए रखते हुए आर्थिक वृद्धि के उद्देश्य को ध्यान में रखना है।
इसके प्रमुख साधनों में रेपो दर, स्थायी जमा सुविधा, सीमांत स्थायी सुविधा, बैंक दर, नकद आरक्षित अनुपात और खुले बाजार की कार्रवाइयाँ शामिल हैं।
पुरानी पुस्तकों में रिवर्स रेपो दर को मौद्रिक नीति गलियारे की मुख्य निचली दर बताया जाता है। वर्तमान ढाँचे में स्थायी जमा सुविधा ने मुख्य निचली सीमा की भूमिका ले ली है, हालांकि रिवर्स रेपो की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
वैधानिक तरलता अनुपात बैंकिंग नियमन और तरलता प्रबंधन का महत्वपूर्ण साधन है, लेकिन इसे रेपो दर जैसी नीति दर नहीं समझना चाहिए।
अंतिम ऋणदाता
भारतीय रिजर्व बैंक बैंकिंग व्यवस्था के लिए अंतिम ऋणदाता की भूमिका निभाता है।
इसका अर्थ है कि अस्थायी गंभीर तरलता संकट में किसी पात्र बैंक को अन्य स्रोतों से धन उपलब्ध न होने की स्थिति में केंद्रीय बैंक नियमानुसार सहायता उपलब्ध करा सकता है।
यह भूमिका बैंकिंग प्रणाली में विश्वास और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण है।
कृषि एवं ग्रामीण वित्त में भूमिका
भारतीय रिजर्व बैंक ने स्वतंत्रता के बाद कृषि और ग्रामीण ऋण व्यवस्था को संस्थागत रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कृषि और ग्रामीण विकास के लिए एक विशेष शीर्ष संस्था की आवश्यकता के आधार पर राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक — नाबार्ड की स्थापना 12 जुलाई 1982 को की गई।
यह कहना कि “रिजर्व बैंक ने अकेले नाबार्ड की स्थापना की” पूरी तरह सटीक नहीं है। नाबार्ड की स्थापना नाबार्ड अधिनियम, 1981 के तहत की गई और इसकी स्थापना के समय रिजर्व बैंक की कृषि ऋण संबंधी अनेक भूमिकाएँ नई संस्था को हस्तांतरित की गईं।
नाबार्ड सहकारी बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और अन्य पात्र संस्थाओं को कृषि तथा ग्रामीण विकास के लिए पुनर्वित्त और विकासात्मक सहायता उपलब्ध कराता है।
रिजर्व बैंक प्राथमिकता क्षेत्र ऋण, वित्तीय समावेशन और ग्रामीण बैंकिंग संबंधी नियामकीय दिशा-निर्देशों के माध्यम से भी कृषि एवं ग्रामीण वित्त को प्रभावित करता है।
RBI के अन्य महत्वपूर्ण कार्य
भारतीय रिजर्व बैंक बैंकिंग कंपनियों के लाइसेंस, नियमन और पर्यवेक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यह देश की भुगतान और निपटान प्रणालियों के सुरक्षित तथा कुशल संचालन को बढ़ावा देता है।
रिजर्व बैंक वित्तीय स्थिरता बनाए रखने तथा बैंकिंग प्रणाली में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए नियामकीय और पर्यवेक्षी उपाय करता है।
यह सरकारी ऋण प्रबंधन, विदेशी मुद्रा भंडार प्रबंधन, वित्तीय बाजारों के विकास और वित्तीय समावेशन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
महत्वपूर्ण भ्रम और सही तथ्य
भ्रम: बैंक ऑफ बंगाल की स्थापना सीधे 1806 में इसी नाम से हुई थी।
सही: 1806 में बैंक ऑफ कलकत्ता स्थापित हुआ; 1809 में इसका नाम बैंक ऑफ बंगाल हुआ।
भ्रम: 1959 में ठीक सात ही मूल सहयोगी बैंक बनाए गए थे।
सही: भारतीय स्टेट बैंक के सहयोगी बैंकों का विकास अलग-अलग वैधानिक व्यवस्थाओं से हुआ; परीक्षा में बाद के प्रमुख सात सहयोगी बैंकों की सूची अलग से पढ़ें।
भ्रम: देना बैंक और विजया बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय अप्रैल 2018 में हुआ।
सही: विलय 1 अप्रैल 2019 से प्रभावी हुआ।
भ्रम: दस सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का चार बैंकों में विलय सितंबर 2019 में पूरा हो गया।
सही: 2019 में घोषणा हुई; विलय 1 अप्रैल 2020 से प्रभावी हुआ।
भ्रम: भारत में अभी 21 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक हैं।
सही: वर्तमान में 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक हैं।
भ्रम: आईडीबीआई बैंक वर्तमान सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक है।
सही: भारतीय रिजर्व बैंक ने 21 जनवरी 2019 से इसे नियामकीय उद्देश्यों के लिए निजी क्षेत्र के बैंक के रूप में वर्गीकृत किया।
भ्रम: वर्तमान RBI गवर्नर शक्तिकांत दास हैं।
सही: वर्तमान गवर्नर संजय मल्होत्रा हैं।
भ्रम: सभी भारतीय करेंसी नोट RBI जारी करता है।
सही: ₹1 का नोट भारत सरकार जारी करती है।
भ्रम: न्यूनतम आरक्षित प्रणाली में RBI को ठीक ₹85 करोड़ की विदेशी प्रतिभूतियाँ रखना अनिवार्य है।
सही: स्वर्ण और विदेशी प्रतिभूतियों का कुल न्यूनतम मूल्य ₹200 करोड़ तथा स्वर्ण का न्यूनतम मूल्य ₹115 करोड़ होना चाहिए।
भ्रम: CRR और SLR दोनों RBI के पास जमा होते हैं।
सही: CRR रिजर्व बैंक के पास रखा जाता है; SLR बैंकों द्वारा स्वयं निर्धारित तरल परिसंपत्तियों में बनाए रखा जाता है।
भ्रम: RBI विदेशी विनिमय दर को हमेशा एक निश्चित स्तर पर स्थिर रखता है।
सही: भारत में विनिमय दर मुख्यतः बाजार आधारित है; RBI अत्यधिक अस्थिरता की स्थिति में हस्तक्षेप कर सकता है।
भ्रम: RBI ने अकेले 1982 में NABARD स्थापित किया।
सही: NABARD की स्थापना संसद के कानून के तहत हुई; RBI की कृषि ऋण संबंधी कई भूमिकाएँ बाद में NABARD को हस्तांतरित हुईं।
बैंकिंग इतिहास — त्वरित क्रम
⚡ याद रखने का क्रम
प्रमुख तिथियाँ — एक नज़र में
| वर्ष/तिथि | घटना |
|---|---|
| 1806 | बैंक ऑफ कलकत्ता |
| 1840 | बैंक ऑफ बॉम्बे |
| 1843 | बैंक ऑफ मद्रास |
| 1881 | अवध कमर्शियल बैंक |
| 1894 | पंजाब नेशनल बैंक की स्थापना |
| 1921 | इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया |
| 1 अप्रैल 1935 | RBI ने कार्य शुरू किया |
| 1 जनवरी 1949 | RBI का राष्ट्रीयकरण |
| 1 जुलाई 1955 | भारतीय स्टेट बैंक |
| 19 जुलाई 1969 | 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण |
| 15 अप्रैल 1980 | 6 बैंकों का राष्ट्रीयकरण |
| 1993 | न्यू बैंक ऑफ इंडिया का PNB में विलय |
| 1 अप्रैल 2017 | SBI के पाँच सहयोगी बैंक और भारतीय महिला बैंक का विलय |
| 1 अप्रैल 2019 | देना और विजया बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय |
| 1 अप्रैल 2020 | 10 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का 4 बैंकों में विलय |
⚡ अंतिम पुनरावृत्ति बिंदु
1806 — बैंक ऑफ कलकत्ता; 1809 में इसका नाम बैंक ऑफ बंगाल हुआ।
1921 — बैंक ऑफ बंगाल + बैंक ऑफ बॉम्बे + बैंक ऑफ मद्रास = इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया।
1 जुलाई 1955 — इंपीरियल बैंक से भारतीय स्टेट बैंक का गठन।
19 जुलाई 1969 — 14 बड़े निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण।
15 अप्रैल 1980 — 6 और बैंकों का राष्ट्रीयकरण।
1993 — न्यू बैंक ऑफ इंडिया का पंजाब नेशनल बैंक में विलय।
1 अप्रैल 2017 — SBI के पाँच सहयोगी बैंक और भारतीय महिला बैंक का SBI में विलय।
1 अप्रैल 2019 — देना बैंक और विजया बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय।
1 अप्रैल 2020 — 10 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का चार बड़े बैंकों में विलय।
वर्तमान में भारत में 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक हैं।
आईडीबीआई बैंक को RBI ने 2019 से नियामकीय उद्देश्यों के लिए निजी क्षेत्र के बैंक के रूप में वर्गीकृत किया है।
RBI — स्थापना 1 अप्रैल 1935 — राष्ट्रीयकरण 1 जनवरी 1949 — मुख्यालय मुंबई।
RBI के प्रथम गवर्नर — सर ऑसबोर्न स्मिथ।
प्रथम भारतीय गवर्नर — सर सी. डी. देशमुख।
वर्तमान RBI गवर्नर — संजय मल्होत्रा।
₹1 का नोट भारत सरकार जारी करती है; अन्य बैंक नोट RBI जारी करता है।
न्यूनतम आरक्षित प्रणाली में स्वर्ण और विदेशी प्रतिभूतियों का न्यूनतम संयुक्त मूल्य ₹200 करोड़ तथा स्वर्ण का न्यूनतम मूल्य ₹115 करोड़ होना चाहिए।
CRR = RBI के पास नकद आरक्षित राशि, जबकि SLR = बैंक द्वारा स्वयं रखी गई निर्धारित तरल परिसंपत्तियाँ।
RBI केंद्र सरकार का बैंकर, एजेंट और वित्तीय सलाहकार तथा बैंकिंग व्यवस्था का बैंकों का बैंक और अंतिम ऋणदाता है।
RBI विदेशी मुद्रा भंडार का प्रबंधन, बैंकिंग नियमन, मौद्रिक नीति और भुगतान प्रणाली से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य करता है।
NABARD — 12 जुलाई 1982 — कृषि एवं ग्रामीण विकास की शीर्ष विकास वित्तीय संस्था।