लॉर्ड एल्गिन प्रथम
1862–1863 — अल्प कार्यकाल, उत्तर-पश्चिमी सीमा अभियान और धर्मशाला में मृत्यु
लॉर्ड एल्गिन प्रथम का कार्यकाल
लॉर्ड एल्गिन प्रथम 1862 से 1863 ई. तक भारत का वायसराय और गवर्नर-जनरल रहा। उसका कार्यकाल बहुत छोटा, लगभग बीस महीने का था। वह लॉर्ड कैनिंग के बाद भारत आया और अपने संक्षिप्त शासनकाल में मुख्यतः उत्तर-पश्चिमी सीमा की अशांति से जूझता रहा। 1863 ई. में धर्मशाला में उसकी मृत्यु हो गई।
लॉर्ड एल्गिन प्रथम
लॉर्ड कैनिंग का उत्तराधिकारी
लॉर्ड एल्गिन प्रथम का पूरा नाम जेम्स ब्रूस, आठवाँ अर्ल ऑफ एल्गिन था। भारत आने से पहले वह जमैका का गवर्नर और कनाडा का गवर्नर-जनरल भी रह चुका था।
वह 1862 ई. में लॉर्ड कैनिंग का उत्तराधिकारी बना। 1857 के विद्रोह और 1858 में कंपनी शासन की समाप्ति के बाद ब्रिटिश राज की नई प्रशासनिक व्यवस्था अभी प्रारंभिक अवस्था में थी, इसलिए उसके समय कैनिंग द्वारा आरंभ किए गए कई प्रशासनिक कार्य आगे बढ़ाए गए।
वहाबी आंदोलन और सीमा क्षेत्र
उत्तर-पश्चिमी सीमा पर ब्रिटिश अभियान
सामान्य प्रतियोगी-परीक्षा पुस्तकों में “लॉर्ड एल्गिन प्रथम ने वहाबी आंदोलन का दमन किया” प्रमुख तथ्य के रूप में दिया जाता है। उसके शासनकाल में उत्तर-पश्चिमी सीमा पर सिताना से जुड़े धार्मिक-राजनीतिक प्रतिरोधी समूहों और स्थानीय कबीलों के विरुद्ध ब्रिटिश सैन्य अभियान अवश्य चला।
लेकिन भारतीय वहाबी आंदोलन का ब्रिटिश दमन केवल एल्गिन के 1862–63 के छोटे कार्यकाल तक सीमित नहीं था। इसके विरुद्ध ब्रिटिश कार्रवाई 1860 के दशक में कई वर्षों तक चली और बाद में मुकदमों तथा गिरफ्तारियों के माध्यम से भी आंदोलन को कमजोर किया गया। इसलिए इसे एक ही वर्ष या केवल एक वायसराय द्वारा पूरी तरह समाप्त किया गया आंदोलन नहीं समझना चाहिए।
🎯 परीक्षा में याद रखें
लॉर्ड एल्गिन प्रथम — वहाबी/उत्तर-पश्चिमी सीमा के प्रतिरोध के विरुद्ध अभियान से संबंधित।
अंबेला अभियान, 1863
उत्तर-पश्चिमी सीमा की प्रमुख घटना
एल्गिन के शासनकाल की प्रमुख सैन्य घटना 1863 ई. का अंबेला अभियान थी। यह उत्तर-पश्चिमी सीमा क्षेत्र में ब्रिटिश सत्ता के विरोधी समूहों और उन्हें समर्थन देने वाले स्थानीय कबीलों के विरुद्ध चलाया गया अभियान था।
अभियान के दौरान अंग्रेजी सेना को पहाड़ी भूभाग और स्थानीय प्रतिरोध के कारण कठिन संघर्ष करना पड़ा। एल्गिन स्वयं इस अभियान के परिणाम को लेकर चिंतित था, लेकिन अभियान समाप्त होने से पहले ही उसकी मृत्यु हो गई।
📗 महत्वपूर्ण संबंध
लॉर्ड एल्गिन प्रथम — 1863 — अंबेला अभियान — उत्तर-पश्चिमी सीमा।
धर्मशाला में मृत्यु, 1863
पद पर रहते हुए मृत्यु
1863 ई. में एल्गिन उत्तर भारत और हिमालयी क्षेत्रों की यात्रा पर था। इसी दौरान उसका स्वास्थ्य गंभीर रूप से बिगड़ गया।
20 नवंबर 1863 ई. को धर्मशाला, वर्तमान हिमाचल प्रदेश में लॉर्ड एल्गिन प्रथम की मृत्यु हो गई। उस समय वह भारत के वायसराय और गवर्नर-जनरल के पद पर ही था।
उसे धर्मशाला में ही दफनाया गया। इस प्रकार उसका भारत में शासनकाल बहुत छोटा रहा और वह अपने कार्यकाल को पूरा नहीं कर सका।
🎯 सीधा प्रश्न
लॉर्ड एल्गिन प्रथम की मृत्यु — 20 नवंबर 1863 ई. — धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश।
उत्तराधिकारी
एल्गिन के बाद भारत का प्रशासन
एल्गिन की अचानक मृत्यु के कारण स्थायी उत्तराधिकारी के आने तक भारत के प्रशासन की अस्थायी व्यवस्था की गई। इसके बाद सर जॉन लॉरेंस 1864 ई. में भारत का वायसराय और गवर्नर-जनरल बना।
जॉन लॉरेंस इससे पहले पंजाब के प्रशासन और 1857 के विद्रोह के समय अपनी भूमिका के लिए प्रसिद्ध हो चुका था।
एक नज़र में
त्वरित परीक्षा पुनरावृत्ति
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| लॉर्ड एल्गिन प्रथम | 1862–1863 ई. |
| पूर्ववर्ती | लॉर्ड कैनिंग |
| प्रमुख सीमा घटना | अंबेला अभियान, 1863 ई. |
| वहाबी आंदोलन | उसके काल में उत्तर-पश्चिमी सीमा पर दमनात्मक अभियान; व्यापक दमन आगे भी जारी रहा |
| मृत्यु | 20 नवंबर 1863 ई. |
| मृत्यु-स्थान | धर्मशाला, वर्तमान हिमाचल प्रदेश |
| समाधि | धर्मशाला |
| अगला स्थायी वायसराय | सर जॉन लॉरेंस, 1864 ई. |
⚡ अंतिम पुनरावृत्ति
लॉर्ड एल्गिन प्रथम — 1862–1863 ई. — लॉर्ड कैनिंग का उत्तराधिकारी।
सामान्य परीक्षा तथ्य में उसे वहाबी आंदोलन के दमन से जोड़ा जाता है; उसके समय उत्तर-पश्चिमी सीमा पर ब्रिटिश सैन्य अभियान चला, लेकिन आंदोलन के विरुद्ध कार्रवाई बाद के वर्षों में भी जारी रही।
1863 ई. — अंबेला अभियान उसके शासनकाल की प्रमुख सैन्य घटना थी।
20 नवंबर 1863 ई. — धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश में मृत्यु; उसे वहीं दफनाया गया।
एल्गिन का कार्यकाल अत्यंत छोटा रहा और उसके बाद 1864 ई. में सर जॉन लॉरेंस वायसराय बना।