लॉर्ड विलियम बेंटिंक
1828–1835 — सामाजिक सुधार, शिक्षा, प्रशासन और 1833 का चार्टर एक्ट
लॉर्ड विलियम बेंटिंक का कार्यकाल
लॉर्ड विलियम बेंटिंक 1828 से 1835 ई. तक गवर्नर-जनरल रहा। उसके शासनकाल को सामाजिक सुधारों, प्रशासनिक मितव्ययिता और शिक्षा संबंधी परिवर्तनों के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है। उसके समय सती प्रथा को अवैध घोषित किया गया, ठगों के विरुद्ध संगठित अभियान चलाया गया, 1833 का चार्टर एक्ट लागू हुआ और 1835 में कलकत्ता मेडिकल कॉलेज की स्थापना हुई।
बंगाल से भारत का गवर्नर-जनरल
1833 के चार्टर एक्ट का महत्वपूर्ण परिवर्तन
बेंटिंक ने 1828 ई. में बंगाल के गवर्नर-जनरल के रूप में कार्यभार संभाला। उसके शासनकाल में पारित 1833 के चार्टर एक्ट ने बंगाल के गवर्नर-जनरल के पद को भारत का गवर्नर-जनरल बना दिया।
इस प्रकार लॉर्ड विलियम बेंटिंक भारत का प्रथम गवर्नर-जनरल बना। यह परिवर्तन ब्रिटिश भारतीय प्रशासन के अधिक केंद्रीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था।
1833 के चार्टर एक्ट ने भारत में कंपनी के शासन के लिए विधायी केंद्रीकरण को भी मजबूत किया और गवर्नर-जनरल की परिषद में कानून निर्माण के लिए एक अतिरिक्त सदस्य की व्यवस्था की। बाद में थॉमस बैबिंगटन मैकाले प्रथम विधि सदस्य बना।
🎯 परीक्षा में याद रखें
1833 का चार्टर एक्ट — बंगाल का गवर्नर-जनरल → भारत का गवर्नर-जनरल — प्रथम: लॉर्ड विलियम बेंटिंक।
सती प्रथा का उन्मूलन, 1829
महत्वपूर्ण सामाजिक सुधार
बेंटिंक के शासनकाल का सबसे प्रसिद्ध सामाजिक सुधार सती प्रथा का उन्मूलन था। 1829 ई. के विनियम XVII द्वारा बंगाल प्रेसीडेंसी में सती को अवैध और दंडनीय घोषित किया गया।
राजा राममोहन राय ने सती प्रथा के विरुद्ध सामाजिक और बौद्धिक अभियान चलाया तथा इसके उन्मूलन के लिए महत्वपूर्ण जनमत तैयार किया। बेंटिंक के प्रशासन ने इस कुप्रथा को कानून द्वारा प्रतिबंधित किया।
प्रारंभिक प्रतिबंध बंगाल प्रेसीडेंसी में लागू हुआ और बाद में इसे ब्रिटिश भारत के अन्य प्रेसीडेंसी क्षेत्रों में भी लागू किया गया।
🎯 महत्वपूर्ण युग्म
सती प्रथा का उन्मूलन — 1829 ई. — लॉर्ड विलियम बेंटिंक — राजा राममोहन राय के सुधार आंदोलन का महत्वपूर्ण योगदान।
ठगों के विरुद्ध अभियान
विलियम हेनरी स्लीमन की भूमिका
बेंटिंक के शासनकाल में ठगी के विरुद्ध संगठित दमन अभियान चलाया गया। इस अभियान से सबसे प्रमुख रूप से विलियम हेनरी स्लीमन का नाम जुड़ा है।
ठग यात्रियों के साथ मिलकर उन्हें लूटने और हत्या करने वाले संगठित गिरोहों के रूप में कुख्यात थे। कंपनी सरकार ने उनके नेटवर्क की पहचान, गिरफ्तारी और दमन के लिए विशेष अभियान चलाए।
यह अभियान 1830 के दशक में तेजी से आगे बढ़ा। इसलिए “1830 में ठगी पूरी तरह समाप्त हो गई” की जगह यह याद रखना अधिक सही है कि बेंटिंक के शासनकाल में स्लीमन के नेतृत्व में ठगों के विरुद्ध व्यापक दमन अभियान चलाया गया और बाद के वर्षों में भी यह कार्रवाई जारी रही।
📗 नाम याद रखें
ठगी का दमन — विलियम हेनरी स्लीमन।
शिक्षा नीति और मैकाले, 1835
अंग्रेजी शिक्षा को सरकारी समर्थन
बेंटिंक के शासनकाल में शिक्षा नीति में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ। थॉमस बैबिंगटन मैकाले ने 1835 ई. में शिक्षा संबंधी अपना प्रसिद्ध विवरण प्रस्तुत किया, जिसमें उच्च शिक्षा के लिए अंग्रेजी भाषा और पाश्चात्य ज्ञान को प्राथमिकता देने का समर्थन किया गया।
इसके बाद बेंटिंक सरकार ने 1835 ई. में अंग्रेजी शिक्षा को बढ़ावा देने वाली नीति स्वीकार की और सरकारी शिक्षा-व्यय को यूरोपीय साहित्य और विज्ञान के प्रसार की ओर अधिक केंद्रित किया गया।
🎯 परीक्षा तथ्य
मैकाले का शिक्षा संबंधी विवरण — 1835 ई. — बेंटिंक का शासनकाल।
कलकत्ता मेडिकल कॉलेज, 1835
आधुनिक चिकित्सा शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र
1835 ई. में बेंटिंक के शासनकाल में कलकत्ता मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई। इसका उद्देश्य पाश्चात्य पद्धति पर आधुनिक चिकित्सा शिक्षा प्रदान करना था।
यह संस्था भारत में आधुनिक पाश्चात्य चिकित्सा शिक्षा के विकास की महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक बनी। चिकित्सा और शरीर-विज्ञान की आधुनिक शिक्षा को संस्थागत रूप देने में इसका विशेष महत्व रहा।
🎯 सीधा प्रश्न
कलकत्ता मेडिकल कॉलेज — 1835 ई. — लॉर्ड विलियम बेंटिंक के शासनकाल में।
प्रशासनिक और आर्थिक सुधार
खर्च में कमी और प्रशासनिक मितव्ययिता
बेंटिंक ने कंपनी की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए प्रशासनिक खर्च कम करने और मितव्ययिता की नीति अपनाई। उसने असैनिक और सैनिक प्रशासन के विभिन्न खर्चों की समीक्षा कर अनावश्यक व्यय में कटौती का प्रयास किया।
उसके शासनकाल में भारतीयों को प्रशासन में कुछ अधिक अवसर देने की दिशा में भी कदम दिखाई देते हैं। 1833 के चार्टर एक्ट में सिद्धांततः यह घोषित किया गया कि धर्म, जन्मस्थान, वंश या रंग के आधार पर किसी व्यक्ति को कंपनी के अधीन पद पाने से वंचित नहीं किया जाना चाहिए, हालांकि व्यवहार में उच्च पदों पर यूरोपियों का प्रभुत्व बना रहा।
मद्रास के गवर्नर के रूप में बेंटिंक
वेल्लौर विद्रोह से जुड़ा पूर्व कार्यकाल
भारत का गवर्नर-जनरल बनने से बहुत पहले बेंटिंक मद्रास का गवर्नर भी रह चुका था। उसके मद्रास शासनकाल के दौरान 1806 ई. का वेल्लौर सैनिक विद्रोह हुआ था।
वेल्लौर विद्रोह के समय भारत का कार्यवाहक गवर्नर-जनरल सर जॉर्ज बार्लो था, जबकि मद्रास का गवर्नर विलियम बेंटिंक था। विद्रोह के बाद मद्रास प्रशासन की नीतियों की आलोचना हुई और बेंटिंक को वापस बुला लिया गया।
⚠️ भ्रम से बचें
वेल्लौर विद्रोह, 1806 — कार्यवाहक गवर्नर-जनरल: सर जॉर्ज बार्लो; मद्रास का गवर्नर: विलियम बेंटिंक।
एक नज़र में
त्वरित परीक्षा पुनरावृत्ति
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| लॉर्ड विलियम बेंटिंक | 1828–1835 ई. |
| 1833 का चार्टर एक्ट | बंगाल के गवर्नर-जनरल का पद भारत के गवर्नर-जनरल में परिवर्तित |
| भारत का प्रथम गवर्नर-जनरल | लॉर्ड विलियम बेंटिंक |
| सती प्रथा का उन्मूलन | 1829 ई. |
| सती विरोध से प्रमुख नाम | राजा राममोहन राय |
| ठगी का दमन | विलियम हेनरी स्लीमन के नेतृत्व में व्यापक अभियान |
| मैकाले का शिक्षा संबंधी विवरण | 1835 ई. |
| कलकत्ता मेडिकल कॉलेज | 1835 ई. |
| पूर्व पद | मद्रास का गवर्नर; उसके समय 1806 का वेल्लौर विद्रोह |
घटनाक्रम
तिथियों का आसान क्रम
🧠 याद रखने का क्रम
⚡ अंतिम पुनरावृत्ति
लॉर्ड विलियम बेंटिंक — 1828–1835 ई.
1833 का चार्टर एक्ट — बंगाल के गवर्नर-जनरल को भारत का गवर्नर-जनरल बनाया गया; विलियम बेंटिंक भारत का प्रथम गवर्नर-जनरल बना।
1829 ई. — सती प्रथा का उन्मूलन; राजा राममोहन राय के सती-विरोधी सुधार आंदोलन का महत्वपूर्ण योगदान।
विलियम हेनरी स्लीमन — बेंटिंक के शासनकाल में ठगों के विरुद्ध संगठित दमन अभियान से प्रमुख रूप से संबंधित।
1835 ई. — मैकाले का शिक्षा संबंधी विवरण और अंग्रेजी शिक्षा को सरकारी समर्थन।
1835 ई. — कलकत्ता मेडिकल कॉलेज की स्थापना।
1806 के वेल्लौर विद्रोह के समय बेंटिंक मद्रास का गवर्नर था; उस समय कार्यवाहक गवर्नर-जनरल सर जॉर्ज बार्लो था।