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वायुमंडल
ATMOSPHERE

वायुमंडल

संघटन, गैसें, जलवाष्प, धूलकण तथा वायुमंडल की प्रमुख परतें

वायुमंडल क्या है?

वायुमंडल पृथ्वी को चारों ओर से घेरने वाला गैसों का विशाल आवरण है। यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण उसके चारों ओर बना रहता है और जीवन के अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक है।

वायुमंडल में विभिन्न गैसों के साथ जलवाष्प, धूलकण, समुद्री लवण, धुआँ, परागकण तथा अन्य सूक्ष्म कण भी पाए जाते हैं। इनका मौसम, जलवायु, बादल निर्माण और पृथ्वी के ताप-संतुलन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

वायुमंडल की कोई बिल्कुल स्पष्ट ऊपरी सीमा नहीं है। ऊँचाई बढ़ने के साथ यह लगातार विरल होता जाता है और अंततः अंतरिक्ष में धीरे-धीरे विलीन हो जाता है।

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वायुमंडल का संघटन

वायुमंडल अनेक गैसों का मिश्रण है। समुद्र तल के निकट शुष्क वायु में नाइट्रोजन, ऑक्सीजन और आर्गन मिलकर लगभग पूरा वायुमंडलीय आयतन बनाते हैं।

इन स्थायी गैसों के अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, निऑन, हीलियम, हाइड्रोजन, ओजोन और अन्य गैसें बहुत कम मात्रा में पाई जाती हैं।

वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा स्थिर नहीं होती। स्थान, तापमान, ऊँचाई और मौसम के अनुसार इसमें बहुत अधिक परिवर्तन हो सकता है।

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वायुमंडल की प्रमुख गैसें

गैस लगभग मात्रा मुख्य महत्त्व
नाइट्रोजन 78.08% सबसे अधिक मात्रा; नाइट्रोजन चक्र एवं जीवों के पोषण में महत्वपूर्ण
ऑक्सीजन 20.95% श्वसन एवं दहन के लिए आवश्यक
आर्गन 0.93% निष्क्रिय उत्कृष्ट गैस
कार्बन डाइऑक्साइड लगभग 0.04% से कुछ अधिक प्रकाश संश्लेषण एवं ग्रीनहाउस प्रभाव
अन्य सूक्ष्म गैसें बहुत कम मात्रा निऑन, हीलियम, मीथेन, हाइड्रोजन आदि

🎯 सबसे महत्वपूर्ण क्रम

नाइट्रोजन → ऑक्सीजन → आर्गन → कार्बन डाइऑक्साइड

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नाइट्रोजन

नाइट्रोजन वायुमंडल में सर्वाधिक मात्रा में पाई जाने वाली गैस है। शुष्क वायु में इसकी मात्रा लगभग 78.08 प्रतिशत होती है।

नाइट्रोजन जीव-जगत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रोटीन, अमीनो अम्ल और न्यूक्लिक अम्ल जैसे जैविक पदार्थों का आवश्यक घटक है।

हालाँकि अधिकांश पौधे वायुमंडलीय नाइट्रोजन गैस को सीधे उपयोग नहीं कर सकते। नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले जीवाणु तथा अन्य प्रक्रियाएँ इसे उपयोग योग्य यौगिकों में बदलती हैं।

वायुमंडल में इसकी बड़ी मात्रा ऑक्सीजन को पतला करने में भी सहायता करती है, जिससे दहन अत्यधिक तीव्र गति से नहीं होता।

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ऑक्सीजन

ऑक्सीजन वायुमंडल की दूसरी सर्वाधिक मात्रा वाली गैस है। इसकी मात्रा लगभग 20.95 प्रतिशत होती है।

यह अधिकांश जीवों के श्वसन के लिए आवश्यक है तथा कोशिकीय ऊर्जा उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

ऑक्सीजन दहन की क्रिया को भी संभव बनाती है। इसके अतिरिक्त चट्टानों और खनिजों के ऑक्सीकरण जैसी अनेक प्राकृतिक रासायनिक प्रक्रियाओं में इसकी भूमिका होती है।

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आर्गन

आर्गन वायुमंडल में लगभग 0.93 प्रतिशत मात्रा में पाया जाता है। नाइट्रोजन और ऑक्सीजन के बाद यह शुष्क वायु की तीसरी सबसे अधिक मात्रा वाली गैस है।

यह एक उत्कृष्ट या निष्क्रिय गैस है और सामान्य प्राकृतिक परिस्थितियों में बहुत कम रासायनिक अभिक्रियाएँ करती है।

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कार्बन डाइऑक्साइड

कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल में बहुत कम मात्रा में पाई जाती है, लेकिन इसका जलवायु और जीवमंडल में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान है। सामान्य परीक्षा-पुस्तकों में इसकी मात्रा लगभग 0.04 प्रतिशत लिखी जाती है।

वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा स्थिर नहीं है और मानव गतिविधियों के कारण दीर्घकाल में बढ़ी है। इसलिए इसे कठोर स्थायी प्रतिशत न मानकर लगभग 0.04 प्रतिशत से थोड़ा अधिक समझना अधिक उचित है।

हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके भोजन बनाते हैं और ऑक्सीजन मुक्त करते हैं।

कार्बन डाइऑक्साइड एक महत्वपूर्ण ग्रीनहाउस गैस है। यह पृथ्वी से निकलने वाले अवरक्त विकिरण के एक भाग को अवशोषित करके पृथ्वी के ताप-संतुलन को प्रभावित करती है।

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अन्य सूक्ष्म गैसें

वायुमंडल में निऑन, हीलियम, मीथेन, क्रिप्टॉन, हाइड्रोजन, नाइट्रस ऑक्साइड और ओजोन जैसी गैसें अत्यंत कम मात्रा में पाई जाती हैं।

मात्रा कम होने के बावजूद इनमें से कुछ गैसों का प्रभाव बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है। उदाहरण के लिए मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड प्रभावी ग्रीनहाउस गैसें हैं।

हाइड्रोजन सबसे हल्का तत्व है। ऊपरी वायुमंडल में हाइड्रोजन तथा हीलियम जैसी हल्की गैसों का सापेक्ष महत्व बढ़ जाता है।

⚠️ प्रतिशत संबंधी सावधानी

“अन्य गैसें = ठीक 0.01%” को कठोर मान न समझें। यह सामान्यीकृत परीक्षा आँकड़ा है; अलग-अलग सूक्ष्म गैसों की वास्तविक मात्रा अलग होती है।

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जलवाष्प

जलवाष्प वायुमंडल का अत्यंत परिवर्तनशील घटक है। इसकी मात्रा स्थान, तापमान, ऋतु और ऊँचाई के अनुसार बदलती रहती है।

गर्म और आर्द्र उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में इसकी मात्रा अधिक हो सकती है, जबकि शुष्क रेगिस्तानी तथा अत्यंत ठंडे क्षेत्रों में बहुत कम होती है।

जलवाष्प बादल, वर्षा, हिमपात, कोहरा और अन्य मौसमी घटनाओं की मूल सामग्री है।

यह स्वयं एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक ग्रीनहाउस गैस भी है और पृथ्वी के ताप-संतुलन में योगदान करती है।

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धूलकण एवं सूक्ष्म कण

वायुमंडल में धूल, धुआँ, समुद्री लवण, राख, परागकण और अन्य सूक्ष्म कण पाए जाते हैं। इन्हें व्यापक रूप से वायुमंडलीय कण कहा जाता है।

ये कण सूर्य के प्रकाश को परावर्तित, प्रकीर्णित और अवशोषित कर सकते हैं, जिससे पृथ्वी के तापमान और दृश्यता पर प्रभाव पड़ता है।

अनेक सूक्ष्म कण जलवाष्प के संघनन के लिए केंद्र का कार्य करते हैं। जलवाष्प इनके आसपास संघनित होकर छोटी जल-बूँदें बना सकती है और बादल निर्माण में सहायता करती है।

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वायुमंडल के संघटन का महत्व

वायुमंडल का संतुलित संघटन पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक है। ऑक्सीजन श्वसन में तथा कार्बन डाइऑक्साइड प्रकाश संश्लेषण में महत्वपूर्ण है।

नाइट्रोजन जैविक पदार्थों के निर्माण और नाइट्रोजन चक्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प, मीथेन और अन्य ग्रीनहाउस गैसें पृथ्वी से निकलने वाली ऊष्मा के एक भाग को रोककर प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव उत्पन्न करती हैं।

समतापमंडल में स्थित ओजोन परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों के बड़े भाग को अवशोषित करके जीव-जगत की रक्षा करती है।

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वायुमंडल की प्रमुख परतें

तापमान में ऊँचाई के साथ होने वाले परिवर्तन के आधार पर वायुमंडल को पाँच मुख्य परतों में बाँटा जाता है—क्षोभमंडल, समतापमंडल, मध्यमंडल, तापमंडल और बाह्यमंडल

इन परतों के बीच क्रमशः क्षोभसीमा, समतापसीमा, मध्यसीमा और तापसीमा जैसी संक्रमण सीमाएँ पाई जाती हैं।

क्षोभमंडल समतापमंडल मध्यमंडल तापमंडल बाह्यमंडल
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क्षोभमंडल

क्षोभमंडल वायुमंडल की सबसे निचली परत है और पृथ्वी की सतह से प्रारंभ होती है। इसकी ऊँचाई सभी स्थानों पर समान नहीं होती।

ध्रुवीय क्षेत्रों में यह लगभग 8 किलोमीटर तक, मध्य अक्षांशों में लगभग 10–12 किलोमीटर और विषुवतीय क्षेत्रों में लगभग 16–18 किलोमीटर तक पहुँच सकती है।

वायुमंडल के कुल द्रव्यमान का लगभग 75–80 प्रतिशत भाग इसी परत में पाया जाता है। वायुमंडलीय जलवाष्प और धूलकणों का भी अधिकांश भाग यहीं केंद्रित होता है।

बादल, वर्षा, तूफान, कोहरा, हिमपात और लगभग सभी सामान्य मौसमी घटनाएँ इसी परत में होती हैं।

क्षोभमंडल में सामान्यतः ऊँचाई बढ़ने पर तापमान घटता जाता है।

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सामान्य तापह्रास दर

क्षोभमंडल में ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान घटने की औसत दर को सामान्य तापह्रास दर कहा जाता है।

मानक औसत तापह्रास दर लगभग 6.5°C प्रति 1,000 मीटर है। इसका अर्थ लगभग प्रत्येक 154 मीटर की ऊँचाई पर 1°C तापमान की कमी है।

पुरानी भारतीय प्रतियोगी परीक्षा पुस्तकों में अक्सर 165 मीटर पर 1°C की कमी लिखी जाती है। यह एक सामान्यीकृत पारंपरिक मान है, लेकिन आधुनिक मानक औसत लगभग 6.5°C प्रति किलोमीटर है।

वास्तविक तापह्रास दर हर समय और हर स्थान पर समान नहीं होती। मौसम, नमी और वायु की स्थिति के अनुसार इसमें परिवर्तन होता रहता है।

🎯 परीक्षा-सुरक्षित तथ्य

मानक औसत तापह्रास — 6.5°C प्रति 1,000 मीटर।
पुरानी पुस्तकों का प्रचलित मान — लगभग 165 मीटर पर 1°C

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क्षोभसीमा

क्षोभमंडल और समतापमंडल के बीच स्थित संक्रमण सीमा को क्षोभसीमा कहा जाता है।

इसकी ऊँचाई ध्रुवों पर कम और विषुवत रेखा के आसपास अधिक होती है। इसी कारण क्षोभमंडल की मोटाई भी अक्षांश के अनुसार बदलती है।

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समतापमंडल

समतापमंडल क्षोभमंडल के ऊपर स्थित है। यह क्षोभसीमा से प्रारंभ होकर लगभग 50 किलोमीटर की ऊँचाई तक फैला होता है। इसलिए इसका निचला स्तर स्थान के अनुसार लगभग 8 से 18 किलोमीटर के बीच बदल सकता है।

इस परत में ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान सामान्यतः बढ़ता है। इसका प्रमुख कारण ओजोन द्वारा सूर्य की पराबैंगनी किरणों का अवशोषण है।

क्षोभमंडल की तुलना में यह परत अपेक्षाकृत शुष्क और स्थिर होती है। लगभग सभी सामान्य मौसम संबंधी घटनाएँ इसके नीचे क्षोभमंडल में होती हैं।

ऊँची उड़ान वाले कई जेट विमान क्षोभसीमा के आसपास अथवा निचले समतापमंडल में उड़ सकते हैं, जहाँ सामान्यतः क्षोभमंडल की तुलना में वायुमंडलीय विक्षोभ कम होता है।

⚠️ महत्वपूर्ण स्पष्टता

“समतापमंडल में बिल्कुल कोई मौसम संबंधी घटना नहीं होती” कहना अत्यधिक कठोर है। सुरक्षित तथ्य यह है कि लगभग सभी सामान्य मौसम संबंधी घटनाएँ क्षोभमंडल में होती हैं और समतापमंडल अपेक्षाकृत स्थिर होता है।

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ओजोन परत

ओजोन परत मुख्यतः समतापमंडल में स्थित ओजोन की अपेक्षाकृत अधिक सांद्रता वाला क्षेत्र है।

यह सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों के बड़े भाग को अवशोषित करती है। इससे पृथ्वी की सतह पर जीवों को अत्यधिक पराबैंगनी विकिरण से सुरक्षा मिलती है।

ओजोन द्वारा पराबैंगनी ऊर्जा के अवशोषण के कारण समतापमंडल का ऊपरी भाग गर्म होता है, इसलिए इस परत में ऊँचाई के साथ तापमान बढ़ने लगता है।

🎯 सबसे महत्वपूर्ण

ओजोन परत — समतापमंडल — पराबैंगनी किरणों का अवशोषण।

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मध्यमंडल

मध्यमंडल समतापमंडल के ऊपर लगभग 50 किलोमीटर से 80–85 किलोमीटर की ऊँचाई तक विस्तृत होता है।

इस परत में ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान पुनः घटता जाता है।

मध्यमंडल के ऊपरी भाग अर्थात मध्यसीमा के पास तापमान लगभग -90°C या उससे भी कम हो सकता है। इसलिए इसे वायुमंडल का सबसे ठंडा क्षेत्र माना जाता है।

पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने वाले अधिकांश छोटे उल्कापिंड वायु-कणों के साथ तीव्र अंतःक्रिया के कारण इसी क्षेत्र में गर्म होकर चमकते और विघटित हो जाते हैं।

🎯 याद रखें

मध्यमंडल — उल्काएँ — सबसे ठंडा क्षेत्र।

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तापमंडल

तापमंडल मध्यमंडल के ऊपर लगभग 80–85 किलोमीटर से शुरू होकर कई सौ किलोमीटर की ऊँचाई तक विस्तृत होता है। विभिन्न परिभाषाओं में इसकी ऊपरी सीमा लगभग 500 से 700 किलोमीटर या उससे अधिक भी दी जा सकती है।

यहाँ ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान तेजी से बढ़ सकता है। सूर्य से आने वाले उच्च ऊर्जा विकिरण को गैसीय कण अवशोषित करते हैं, जिससे कणों की गतिज ऊर्जा बहुत बढ़ जाती है।

तापमान 1,500°C से अधिक तथा तीव्र सौर गतिविधि के समय इससे भी बहुत अधिक हो सकता है। लेकिन यहाँ वायु अत्यंत विरल होती है, इसलिए इतनी ऊँची तापमान संख्या का अर्थ पृथ्वी की सतह जैसी तीव्र गर्मी महसूस होना नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन लगभग 400 किलोमीटर के आसपास पृथ्वी की परिक्रमा करता है और इस कारण तापमंडल में स्थित माना जाता है।

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आयनमंडल

आयनमंडल वायुमंडल का ऐसा क्षेत्र है जहाँ सूर्य की उच्च-ऊर्जा पराबैंगनी और एक्स-किरणों के प्रभाव से गैसीय परमाणु और अणु आयन तथा मुक्त इलेक्ट्रॉन बनाते हैं। इस प्रक्रिया को आयनीकरण कहते हैं।

आयनमंडल को तापमान के आधार पर बनी पाँच मुख्य परतों में से अलग छठी स्थिर परत मानना पूरी तरह सही नहीं है। यह मुख्यतः मध्यमंडल, तापमंडल और ऊपरी वायुमंडल के कुछ भागों पर फैला हुआ आयनीकृत क्षेत्र है।

इसका विस्तार सूर्य की गतिविधि, दिन और रात तथा ऊँचाई के अनुसार बदलता रहता है।

आयनमंडल रेडियो तरंगों के प्रसार को प्रभावित करता है। इसकी विभिन्न आयनीकृत परतें कुछ रेडियो आवृत्तियों को मोड़ या परावर्तित कर सकती हैं, जिससे लंबी दूरी का रेडियो संचार संभव होता है।

ऊपरी वायुमंडल में होने वाली ध्रुवीय ज्योति भी आयनित कणों और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से संबंधित घटना है।

⚠️ सबसे महत्वपूर्ण सुधार

आयनमंडल = तापमंडल नहीं है। तापमंडल तापमान के आधार पर बनी परत है, जबकि आयनमंडल विद्युत-आवेशित कणों वाला क्षेत्र है और यह कई ऊँचाई स्तरों पर फैला रहता है।

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कृत्रिम उपग्रह और वायुमंडल

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तापमंडल में पृथ्वी की निचली कक्षा में परिक्रमा करता है।

लेकिन सभी कृत्रिम उपग्रह तापमंडल में ही स्थित नहीं होते। उपग्रह विभिन्न ऊँचाइयों और कक्षाओं में परिक्रमा करते हैं। कुछ निम्न पृथ्वी कक्षा में होते हैं, जबकि संचार एवं मौसम संबंधी कई उपग्रह पृथ्वी से बहुत अधिक ऊँचाई पर स्थित होते हैं।

इसलिए “सभी कृत्रिम उपग्रह आयनमंडल या तापमंडल में होते हैं” कहना सही नहीं है।

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बाह्यमंडल

बाह्यमंडल पृथ्वी के वायुमंडल की सबसे बाहरी परत है। इसकी निचली सीमा को अलग-अलग मॉडल लगभग 500–700 किलोमीटर के आसपास रखते हैं।

यहाँ वायु अत्यंत विरल होती है और गैस के कणों के बीच की दूरी बहुत अधिक होती है।

इस क्षेत्र में हाइड्रोजन और हीलियम जैसी हल्की गैसों का महत्व अधिक हो जाता है।

बाह्यमंडल की कोई कठोर ऊपरी सीमा नहीं है। यह हजारों किलोमीटर तक विस्तृत होकर धीरे-धीरे अंतरग्रहीय अंतरिक्ष में मिल जाता है।

इस क्षेत्र के कुछ अत्यधिक ऊर्जावान हल्के कण पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से निकलकर अंतरिक्ष में जा सकते हैं।

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ऊँचाई के साथ तापमान में परिवर्तन

परत ऊँचाई के साथ तापमान मुख्य कारण/विशेषता
क्षोभमंडल घटता है पृथ्वी की सतह से दूर जाने पर सामान्य शीतलन
समतापमंडल बढ़ता है ओजोन द्वारा पराबैंगनी विकिरण का अवशोषण
मध्यमंडल घटता है मध्यसीमा के पास न्यूनतम तापमान
तापमंडल बहुत तेजी से बढ़ता है उच्च ऊर्जा सौर विकिरण का अवशोषण
घटता बढ़ता घटता बढ़ता
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वायुमंडल की परतें — एक नज़र में

परत लगभग विस्तार प्रमुख विशेषता
क्षोभमंडल सतह से लगभग 8–18 किमी मौसम, बादल, वर्षा; अधिकांश वायुमंडलीय द्रव्यमान
समतापमंडल क्षोभसीमा से लगभग 50 किमी ओजोन परत; तापमान बढ़ता है
मध्यमंडल लगभग 50–80/85 किमी उल्काएँ; सबसे ठंडा क्षेत्र
तापमंडल लगभग 80/85–500/700 किमी अत्यधिक तापमान; ISS; ऊपरी आयनित क्षेत्र
बाह्यमंडल लगभग 500/700 किमी से ऊपर सबसे बाहरी, अत्यंत विरल; हाइड्रोजन एवं हीलियम
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प्रमुख मंडल और संबंधित तथ्य

🎯 महत्वपूर्ण जोड़ियाँ

मौसम एवं जलवायु संबंधी घटनाएँ — क्षोभमंडल

सामान्य तापह्रास — क्षोभमंडल

ओजोन परत — समतापमंडल

तापमान ऊँचाई के साथ बढ़ता है — समतापमंडल

उल्काओं का विघटन — मध्यमंडल

सबसे ठंडा क्षेत्र — मध्यसीमा के आसपास

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन — तापमंडल

रेडियो संचार में महत्वपूर्ण — आयनमंडल

सबसे बाहरी परत — बाह्यमंडल

हाइड्रोजन एवं हीलियम — बाह्यमंडल में प्रमुख हल्की गैसें

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भ्रम पैदा करने वाले प्रमुख तथ्य

भ्रम: क्षोभमंडल सभी स्थानों पर 18 किमी तक होता है।
सही: इसकी ऊँचाई ध्रुवों पर लगभग 8 किमी तथा विषुवतीय क्षेत्रों में लगभग 16–18 किमी तक हो सकती है।

भ्रम: तापमान प्रत्येक 165 मीटर पर निश्चित रूप से 1°C घटता है।
सही: यह पुराना सामान्यीकृत परीक्षा मान है। मानक औसत तापह्रास लगभग 6.5°C प्रति 1,000 मीटर है।

भ्रम: समतापमंडल 18 किमी से ही हर स्थान पर शुरू होता है।
सही: यह क्षोभसीमा से शुरू होता है, जिसकी ऊँचाई अक्षांश के अनुसार लगभग 8–18 किमी बदलती है।

भ्रम: समतापमंडल में किसी प्रकार की वायुमंडलीय हलचल नहीं होती।
सही: यह क्षोभमंडल की तुलना में अधिक स्थिर है और लगभग सभी सामान्य मौसम घटनाएँ क्षोभमंडल में होती हैं।

भ्रम: आयनमंडल वायुमंडल की तापमान आधारित चौथी परत है।
सही: चौथी मुख्य तापमान-आधारित परत तापमंडल है; आयनमंडल आयनीकृत क्षेत्र है जो कई परतों को आंशिक रूप से काटता है।

भ्रम: ISS और सभी कृत्रिम उपग्रह आयनमंडल में होते हैं।
सही: ISS तापमंडल में परिक्रमा करता है, लेकिन उपग्रह अनेक अलग-अलग ऊँचाइयों और कक्षाओं में पाए जाते हैं।

भ्रम: बाह्यमंडल ठीक 500 किमी से शुरू होकर किसी निश्चित ऊँचाई पर समाप्त होता है।
सही: इसकी सीमा निश्चित नहीं है; अलग मॉडल लगभग 500–700 किमी के आसपास शुरुआत बताते हैं और यह धीरे-धीरे अंतरिक्ष में मिल जाता है।

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त्वरित पुनरावृत्ति

⚡ क्रम में याद करें

क्षोभमंडल — मौसम समतापमंडल — ओजोन मध्यमंडल — उल्का तापमंडल — ISS बाह्यमंडल — अंतरिक्ष

⚡ अंतिम पुनरावृत्ति बिंदु

वायुमंडल पृथ्वी को घेरने वाला गैसों का आवरण है, जिसमें गैसों के अलावा जलवाष्प और सूक्ष्म कण भी पाए जाते हैं।

नाइट्रोजन — 78.08% — वायुमंडल की सर्वाधिक मात्रा वाली गैस।

ऑक्सीजन — 20.95% — श्वसन एवं दहन के लिए महत्वपूर्ण।

आर्गन — लगभग 0.93% — प्रमुख निष्क्रिय गैस।

कार्बन डाइऑक्साइड — लगभग 0.04% से थोड़ा अधिक — प्रकाश संश्लेषण तथा ग्रीनहाउस प्रभाव में महत्वपूर्ण।

जलवाष्प की मात्रा स्थिर नहीं होती और यह बादल, वर्षा तथा मौसम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वायुमंडलीय धूल और सूक्ष्म कण सूर्य के प्रकाश को प्रभावित करते हैं तथा बादल निर्माण के लिए संघनन केंद्र का कार्य कर सकते हैं।

तापमान के आधार पर पाँच प्रमुख परतें — क्षोभमंडल, समतापमंडल, मध्यमंडल, तापमंडल और बाह्यमंडल

क्षोभमंडल — लगभग सभी मौसम संबंधी घटनाएँ; वायुमंडल का लगभग 75–80% द्रव्यमान।

क्षोभमंडल की ऊँचाई — ध्रुवों पर लगभग 8 किमी तथा विषुवतीय क्षेत्रों में लगभग 16–18 किमी

मानक औसत तापह्रास — लगभग 6.5°C प्रति 1,000 मीटर

समतापमंडल — लगभग 50 किमी तक; ओजोन परत इसी में स्थित है और तापमान ऊँचाई के साथ बढ़ता है।

मध्यमंडल — लगभग 50 से 80–85 किमी; अधिकांश छोटे उल्कापिंड इसी क्षेत्र में चमकते और विघटित होते हैं।

वायुमंडल का सबसे ठंडा क्षेत्र मध्यसीमा के आसपास पाया जाता है।

तापमंडल — लगभग 80–85 किमी से कई सौ किमी तक; यहाँ तापमान बहुत अधिक हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तापमंडल में पृथ्वी की परिक्रमा करता है।

आयनमंडल कोई अलग तापमान-आधारित मुख्य परत नहीं, बल्कि आयनित कणों वाला क्षेत्र है जो ऊपरी वायुमंडल के विभिन्न भागों में फैला होता है।

आयनमंडल रेडियो संचार को प्रभावित करने के लिए प्रसिद्ध है।

बाह्यमंडल वायुमंडल की सबसे बाहरी और अत्यंत विरल परत है, जहाँ हाइड्रोजन और हीलियम जैसी हल्की गैसें महत्वपूर्ण होती हैं।

ऊँचाई के साथ तापमान का सामान्य क्रम — क्षोभमंडल में घटता → समतापमंडल में बढ़ता → मध्यमंडल में घटता → तापमंडल में बढ़ता

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