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श्वेत क्रांति और ऑपरेशन फ्लड
WHITE REVOLUTION • OPERATION FLOOD

श्वेत क्रांति और ऑपरेशन फ्लड

डेयरी सहकारिता, वर्गीज कुरियन, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और भारत का दुग्ध विकास

श्वेत क्रांति क्या है?

श्वेत क्रांति से आशय भारत में दुग्ध उत्पादन, डेयरी सहकारिता, दूध संग्रह, प्रसंस्करण और विपणन व्यवस्था में हुए व्यापक विस्तार से है। इस परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम ऑपरेशन फ्लड था, जिसने दुग्ध उत्पादकों को सहकारी संस्थाओं के माध्यम से सीधे बाजार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

श्वेत क्रांति ने दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ ग्रामीण परिवारों के लिए आय और रोजगार के अवसरों को भी मजबूत किया। भारत आगे चलकर विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना।

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श्वेत क्रांति के जनक

डॉ. वर्गीज कुरियन

भारत में श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज कुरियन माने जाते हैं। उन्होंने सहकारी डेयरी मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने और ऑपरेशन फ्लड की योजना तैयार करने में केंद्रीय भूमिका निभाई।

गुजरात के आनंद में विकसित दुग्ध सहकारी व्यवस्था, जिसे आगे चलकर अमूल मॉडल के रूप में प्रसिद्धि मिली, ने राष्ट्रीय डेयरी विकास की रणनीति को महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया।

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड भी डॉ. कुरियन के नेतृत्व में देशभर में सहकारी डेयरी व्यवस्था के विस्तार का प्रमुख संस्थागत माध्यम बना।

🎯 परीक्षा बिंदु

भारत में श्वेत क्रांति के जनक — डॉ. वर्गीज कुरियन

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1960 के दशक के दुग्ध विकास कार्यक्रम

ऑपरेशन फ्लड की पृष्ठभूमि

1960 के दशक में भारत में पशुधन सुधार और दूध की उत्पादकता बढ़ाने के लिए कई सरकारी कार्यक्रम चलाए गए। सघन पशु विकास कार्यक्रम जैसे प्रयासों का उद्देश्य चयनित क्षेत्रों में पशु प्रजनन, पशु स्वास्थ्य, चारा और अन्य सुविधाओं को एक साथ उपलब्ध कराकर दुग्ध उत्पादकता बढ़ाना था।

कुछ सामान्य अध्ययन पुस्तकों में 1964–65 को श्वेत क्रांति की शुरुआत लिखा मिलता है, लेकिन इसे ऑपरेशन फ्लड की औपचारिक शुरुआत के समान नहीं समझना चाहिए। ये पहले के पशुधन और डेयरी विकास प्रयास थे, जबकि ऑपरेशन फ्लड अलग राष्ट्रीय कार्यक्रम के रूप में 1970 में शुरू हुआ

इसलिए सुरक्षित क्रम यह है कि 1960 के दशक में दुग्ध विकास से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों ने आधार तैयार किया और बाद में 1970 में ऑपरेशन फ्लड ने सहकारी डेयरी विकास को बड़े राष्ट्रीय अभियान का स्वरूप दिया।

⚠️ भ्रम से बचें

1964–65 के पशुधन विकास कार्यक्रम ≠ ऑपरेशन फ्लड की औपचारिक शुरुआत। ऑपरेशन फ्लड 1970 में शुरू हुआ।

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ऑपरेशन फ्लड

1970 में आरंभ हुआ राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम

ऑपरेशन फ्लड 1970 में शुरू किया गया। इसे राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा कार्यान्वित किया गया और इसका उद्देश्य भारत में दुग्ध उत्पादन तथा सहकारी डेयरी व्यवस्था को बड़े पैमाने पर विकसित करना था।

इस कार्यक्रम का मूल विचार ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों को सहकारी संस्थाओं के माध्यम से संगठित करके उन्हें शहरों के बड़े दूध बाजारों से जोड़ना था। इससे बिचौलियों की भूमिका कम करने और उत्पादकों को दूध का बेहतर मूल्य दिलाने का प्रयास किया गया।

ऑपरेशन फ्लड के दौरान दूध संग्रह केंद्र, शीत श्रृंखला, प्रसंस्करण संयंत्र, परिवहन और विपणन नेटवर्क का विस्तार किया गया।

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार ऑपरेशन फ्लड 1970 से 1996 तक चला और इसे तीन चरणों में लागू किया गया

📗 याद रखें

ऑपरेशन फ्लड — 1970 से 1996 — तीन चरण

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ऑपरेशन फ्लड के उद्देश्य

उत्पादक से उपभोक्ता तक मजबूत दुग्ध नेटवर्क

दूध उत्पादन में वृद्धि: बेहतर पशु प्रबंधन, स्वास्थ्य, प्रजनन और डेयरी सेवाओं के माध्यम से दुग्ध उत्पादन को बढ़ाना।

दुग्ध उत्पादकों को उचित मूल्य: किसानों और दुग्ध उत्पादकों को सहकारी व्यवस्था से जोड़कर उनके लिए स्थिर बाजार और बेहतर भुगतान सुनिश्चित करना।

उपभोक्ताओं को नियमित दूध आपूर्ति: ग्रामीण उत्पादन क्षेत्रों से शहरी बाजारों तक दूध की नियमित और संगठित आपूर्ति विकसित करना।

बिचौलियों पर निर्भरता कम करना: उत्पादक और उपभोक्ता के बीच सहकारी संस्थाओं की मजबूत व्यवस्था बनाना।

ग्रामीण रोजगार और आय: छोटे एवं सीमांत किसानों तथा भूमिहीन परिवारों को डेयरी के माध्यम से अतिरिक्त और नियमित आय का अवसर देना।

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ऑपरेशन फ्लड के तीन चरण

राष्ट्रीय स्तर पर डेयरी नेटवर्क का विस्तार

चरण अवधि मुख्य उद्देश्य
प्रथम चरण 1970–1981 प्रमुख दुग्ध क्षेत्रों को बड़े शहरी बाजारों से जोड़ना और सहकारी ढाँचे का विस्तार
द्वितीय चरण 1981–1985 दुग्ध संघों, सहकारी समितियों और दूध बाजार नेटवर्क का विस्तार
तृतीय चरण 1985–1996 सहकारी संस्थाओं को मजबूत करना, उत्पादकता और पशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार
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राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड

1965 में स्थापना

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की स्थापना 1965 में हुई। इसका मुख्यालय आनंद, गुजरात में है।

इस संस्था ने भारत में सहकारी डेयरी मॉडल को बढ़ावा देने और ऑपरेशन फ्लड को लागू करने में केंद्रीय भूमिका निभाई।

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड का उद्देश्य दुग्ध उत्पादकों को संगठित करना, डेयरी सहकारी संस्थाओं को मजबूत करना, दूध की उत्पादकता तथा गुणवत्ता बढ़ाना और दुग्ध उत्पादकों को बाजार से बेहतर ढंग से जोड़ना रहा है।

🎯 अत्यंत महत्वपूर्ण

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड — स्थापना 1965 — मुख्यालय आनंद, गुजरात

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राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान

करनाल, हरियाणा

राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान भारत का प्रमुख डेयरी अनुसंधान और शिक्षा संस्थान है तथा इसका मुख्यालय करनाल, हरियाणा में स्थित है।

इस संस्थान का इतिहास 1923 से शुरू होता है, जब इसकी पूर्ववर्ती संस्था बेंगलुरु में इम्पीरियल इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हसबेंड्री एंड डेयरिंग के रूप में स्थापित हुई थी।

1955 में इसका मुख्यालय बेंगलुरु से करनाल स्थानांतरित किया गया और इसे राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान नाम दिया गया। इसलिए “राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान की स्थापना 1955 में करनाल में हुई” को सरल रूप में लिखा जा सकता है, लेकिन अधिक सटीक तथ्य यह है कि संस्था की ऐतिहासिक शुरुआत 1923 में हुई और 1955 में मुख्यालय करनाल स्थानांतरित हुआ तथा वर्तमान नाम मिला

1970 में यह संस्थान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के प्रशासनिक नियंत्रण में आया।

⚠️ परीक्षा में वर्ष का भ्रम

1923 = मूल संस्था की शुरुआत; 1955 = करनाल स्थानांतरण और राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान नाम।

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भारत का दुग्ध उत्पादन

पुराने और वर्तमान आँकड़ों को अलग-अलग समझें

आर्थिक सर्वेक्षण 2014–15 के अनुसार वर्ष 2013–14 में भारत का दूध उत्पादन 137.69 मिलियन टन था। उस समय भारत विश्व में दूध उत्पादन में प्रथम स्थान पर था और विश्व दुग्ध उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग 17 प्रतिशत बताई गई थी।

यह आँकड़ा अपने समय के लिए सही है, लेकिन वर्तमान स्थिति इससे काफी आगे बढ़ चुकी है। इसलिए 137.69 मिलियन टन को वर्तमान दूध उत्पादन नहीं समझना चाहिए।

नवीनतम उपलब्ध मूल पशुपालन सांख्यिकी 2025 के अनुसार वर्ष 2024–25 में भारत का कुल दूध उत्पादन 247.87 मिलियन टन रहा। भारत अब भी विश्व में कुल दूध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है।

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दूध उत्पादन में वृद्धि

2013–14 से 2024–25 तक

वर्ष दूध उत्पादन स्थिति
2013–14 137.69 मिलियन टन आर्थिक सर्वेक्षण 2014–15 में दर्ज
2022–23 230.58 मिलियन टन दुग्ध उत्पादन में निरंतर वृद्धि
2023–24 239.30 मिलियन टन भारत विश्व में प्रथम
2024–25 247.87 मिलियन टन नवीनतम उपलब्ध आधिकारिक आँकड़ा

🎯 नवीनतम तथ्य

2024–25 — भारत का दूध उत्पादन 247.87 मिलियन टन — विश्व में प्रथम

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श्वेत क्रांति की प्रमुख उपलब्धियाँ

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और डेयरी क्षेत्र में परिवर्तन

दुग्ध उत्पादन में वृद्धि: भारत में दूध उत्पादन में दीर्घकालीन और तेज वृद्धि हुई तथा देश विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक बना।

डेयरी सहकारिता का विस्तार: लाखों दुग्ध उत्पादक ग्रामीण सहकारी समितियों और दुग्ध संघों से जुड़े।

ग्रामीण आय में वृद्धि: डेयरी छोटे किसानों और भूमिहीन परिवारों के लिए नियमित नकद आय का महत्वपूर्ण साधन बनी।

दूध विपणन व्यवस्था का विकास: संग्रह, शीतकरण, प्रसंस्करण, परिवहन और शहरी विपणन की संगठित व्यवस्था विकसित हुई।

महिलाओं की भागीदारी: ग्रामीण डेयरी और पशुपालन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी ने घरेलू आय और ग्रामीण आजीविका को मजबूत किया।

अमूल मॉडल का विस्तार: उत्पादक-स्वामित्व वाली सहकारी संरचना राष्ट्रीय स्तर पर डेयरी विकास की प्रमुख प्रेरणा बनी।

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प्रमुख संस्थाएँ और वर्ष

एक नज़र में

संस्था / कार्यक्रम वर्ष महत्व
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान की मूल पूर्ववर्ती संस्था 1923 बेंगलुरु में डेयरी अनुसंधान की शुरुआत
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल 1955 मुख्यालय करनाल स्थानांतरित और वर्तमान नाम
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड 1965 सहकारी डेयरी विकास का प्रमुख संस्थागत आधार
ऑपरेशन फ्लड 1970 राष्ट्रीय स्तर पर श्वेत क्रांति का प्रमुख कार्यक्रम
ऑपरेशन फ्लड का समापन 1996 तीन चरणों में कार्यक्रम पूर्ण
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महत्वपूर्ण भ्रम और सही तथ्य

परीक्षा में गलती से बचने के लिए

श्वेत क्रांति के जनक: डॉ. वर्गीज कुरियन।

ऑपरेशन फ्लड की शुरुआत: 1970 में हुई। इसे 1964–65 में शुरू हुआ कार्यक्रम न मानें।

1960 के दशक के पशुधन विकास कार्यक्रम: ये दुग्ध उत्पादकता बढ़ाने की पृष्ठभूमि का हिस्सा थे, लेकिन ऑपरेशन फ्लड से अलग थे।

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड: 1965 में स्थापित; मुख्यालय आनंद, गुजरात।

राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान: इसकी ऐतिहासिक शुरुआत 1923 में बेंगलुरु में हुई; 1955 में मुख्यालय करनाल स्थानांतरित हुआ और वर्तमान नाम मिला।

137.69 मिलियन टन: यह 2013–14 के दूध उत्पादन का पुराना आँकड़ा है, वर्तमान उत्पादन नहीं।

वर्तमान नवीनतम उपलब्ध आँकड़ा: 2024–25 में भारत का दूध उत्पादन 247.87 मिलियन टन रहा।

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त्वरित पुनरावृत्ति

एक क्रम में याद करें

⚡ आसान क्रम

1923 — डेयरी संस्थान की शुरुआत 1955 — करनाल 1965 — राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड 1970 — ऑपरेशन फ्लड 1996 — समापन

⚡ अंतिम पुनरावृत्ति बिंदु

भारत में श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज कुरियन हैं।

ऑपरेशन फ्लड 1970 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा शुरू किया गया प्रमुख डेयरी विकास कार्यक्रम था।

ऑपरेशन फ्लड 1970 से 1996 तक चला और इसे तीन चरणों में लागू किया गया।

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की स्थापना 1965 में हुई और इसका मुख्यालय आनंद, गुजरात में है।

राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान की ऐतिहासिक शुरुआत 1923 में बेंगलुरु में हुई थी। 1955 में इसका मुख्यालय करनाल स्थानांतरित किया गया और इसे राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान नाम मिला।

1964–65 के पशुधन विकास प्रयासों को ऑपरेशन फ्लड की औपचारिक शुरुआत नहीं समझना चाहिए।

आर्थिक सर्वेक्षण 2014–15 के अनुसार 2013–14 में भारत का दूध उत्पादन 137.69 मिलियन टन था।

नवीनतम उपलब्ध आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार 2024–25 में भारत का दूध उत्पादन 247.87 मिलियन टन रहा और भारत विश्व में दूध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है।

श्वेत क्रांति ने दूध उत्पादन, ग्रामीण आय, सहकारी डेयरी व्यवस्था, रोजगार और संगठित दुग्ध विपणन को मजबूत किया।

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