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भारतीय संसद
PARLIAMENT OF INDIA

भारतीय संसद

लोकसभा, राज्यसभा, विधायी प्रक्रिया, धन विधेयक, समितियाँ और संसदीय कार्यवाही

भारतीय संसद

भारतीय संसद संघ की विधायिका है। यह कानून निर्माण, बजट की स्वीकृति, कार्यपालिका पर संसदीय नियंत्रण, राष्ट्रीय नीतियों पर चर्चा और संविधान द्वारा प्रदान किए गए अन्य विधायी कार्यों का निर्वहन करती है।

भारत में ब्रिटेन की तरह संसद पूर्णतः सर्वोच्च नहीं है। भारतीय संविधान सर्वोच्च है और संसद की विधायी तथा संविधान संशोधन शक्तियाँ संविधान, संघीय व्यवस्था, मूल अधिकारों और न्यायिक समीक्षा जैसी संवैधानिक सीमाओं के अधीन हैं।

संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार भारतीय संसद तीन घटकों से मिलकर बनती है—राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा।

01

संसद से संबंधित प्रमुख अनुच्छेद

संवैधानिक व्यवस्था

अनुच्छेदविषय
79संसद की संरचना।
80राज्यसभा की संरचना।
81लोकसभा की संरचना।
82प्रत्येक जनगणना के बाद सीटों के पुनर्समायोजन से संबंधित प्रावधान।
83संसद के सदनों की अवधि।
85संसद के सत्र, सत्रावसान तथा लोकसभा का विघटन।
86राष्ट्रपति का सदनों को संबोधित करने और संदेश भेजने का अधिकार।
87राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण।
93लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष।
100मतदान और गणपूर्ति।
105संसद तथा सदस्यों के विशेषाधिकार।
108दोनों सदनों की संयुक्त बैठक।
110धन विधेयक की परिभाषा।
111विधेयकों पर राष्ट्रपति की स्वीकृति।
112वार्षिक वित्तीय विवरण।
117वित्तीय विधेयकों से संबंधित विशेष प्रावधान।
123राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति।
02

भारतीय संसद की संरचना

तीन संवैधानिक अंग

1. राष्ट्रपति

2. राज्यसभा — राज्यों की परिषद।

3. लोकसभा — जनता का सदन।

राष्ट्रपति लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य नहीं होता, लेकिन संविधान के अनुसार वह संसद का अभिन्न संवैधानिक अंग है।

03

राष्ट्रपति और संसद

सत्र, अभिभाषण और विधेयक

राष्ट्रपति संसद के सदनों को आहूत करता है तथा उनका सत्रावसान करता है।

राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर लोकसभा को भंग कर सकता है। राज्यसभा भंग नहीं होती।

सदन की किसी बैठक को कुछ समय के लिए स्थगित करना सामान्यतः संबंधित पीठासीन अधिकारी का कार्य है; इसे राष्ट्रपति की सत्रावसान शक्ति से अलग समझना चाहिए।

राष्ट्रपति संसद के सदनों को संबोधित कर सकता है और संदेश भेज सकता है।

संसद द्वारा पारित विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किए जाते हैं।

साधारण विधेयक के संबंध में राष्ट्रपति संविधान के अनुसार स्वीकृति दे सकता है, स्वीकृति रोक सकता है अथवा उसे एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है।

अनुच्छेद 123 के अंतर्गत आवश्यक परिस्थितियों में राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकता है।

04

राज्यसभा

स्थायी सदन

राज्यसभा भारतीय संसद का उच्च सदन है और इसे राज्यों की परिषद कहा जाता है।

संविधान के अनुच्छेद 80 के अनुसार राज्यसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 250 हो सकती है।

इनमें अधिकतम 238 सदस्य राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों के प्रतिनिधि तथा 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जा सकते हैं।

वर्तमान निर्धारित संरचना 245 सदस्यों की है—233 निर्वाचित प्रतिनिधि और 12 मनोनीत सदस्य।

राष्ट्रपति साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले 12 व्यक्तियों को मनोनीत करता है।

राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसे भंग नहीं किया जा सकता।

इसके लगभग एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दूसरे वर्ष सेवानिवृत्त होते हैं।

राज्यसभा के सदस्य का सामान्य कार्यकाल 6 वर्ष होता है।

05

राज्यसभा के पदाधिकारी और सदस्य

सभापति, उपसभापति और निर्वाचन

भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।

राज्यसभा का सभापति स्वयं राज्यसभा का सदस्य नहीं होता।

राज्यसभा अपने सदस्यों में से उपसभापति का चुनाव करती है।

राज्यसभा सदस्य बनने की न्यूनतम आयु 30 वर्ष है।

राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले राज्यसभा सदस्यों का चुनाव संबंधित राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत पद्धति से किया जाता है।

06

राज्यसभा की विशेष शक्तियाँ

अनुच्छेद 249 और 312

राज्यसभा को संघीय व्यवस्था के कारण कुछ ऐसी विशेष शक्तियाँ प्राप्त हैं जो लोकसभा को स्वतंत्र रूप से प्राप्त नहीं हैं।

अनुच्छेद 249: यदि राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से राष्ट्रीय हित में प्रस्ताव पारित करे तो संसद को राज्य सूची के निर्दिष्ट विषय पर कानून बनाने की शक्ति प्राप्त हो सकती है।

अनुच्छेद 312: राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से राष्ट्रीय हित में प्रस्ताव पारित कर संसद को नई अखिल भारतीय सेवा के सृजन का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

राष्ट्रपति के निर्वाचन में राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं; मनोनीत सदस्य राष्ट्रपति चुनाव में भाग नहीं लेते।

🎯 राज्यसभा की विशेष शक्ति

249 — राज्य सूची | 312 — अखिल भारतीय सेवा।

07

धन विधेयक पर राज्यसभा

सीमित वित्तीय शक्ति

धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।

लोकसभा द्वारा पारित होने के बाद इसे राज्यसभा को उसकी सिफारिशों के लिए भेजा जाता है।

राज्यसभा को धन विधेयक अधिकतम 14 दिन तक अपने पास रखने का अधिकार है।

राज्यसभा धन विधेयक में संशोधन करने के लिए बाध्यकारी शक्ति नहीं रखती; वह केवल सिफारिशें कर सकती है।

लोकसभा राज्यसभा की सभी या किसी भी सिफारिश को स्वीकार अथवा अस्वीकार कर सकती है।

08

लोकसभा

जनता का सदन

लोकसभा भारतीय संसद का निम्न सदन है। इसके सदस्य जनता द्वारा प्रत्यक्ष निर्वाचन से चुने जाते हैं।

वर्तमान निर्वाचन व्यवस्था में देश में 543 निर्वाचित लोकसभा सीटें हैं।

अनुच्छेद 81 के अनुसार राज्यों के लिए अधिकतम 530 और संघ राज्यक्षेत्रों के लिए अधिकतम 20 निर्वाचित स्थानों की व्यवस्था की जा सकती है।

पुरानी पुस्तकों में लोकसभा की अधिकतम संख्या 552 लिखी मिलती है, जिसमें 530 राज्य + 20 संघ राज्यक्षेत्र + 2 आंग्ल-भारतीय मनोनीत सदस्य शामिल किए जाते थे।

लेकिन आंग्ल-भारतीय समुदाय के लोकसभा में विशेष मनोनयन की संवैधानिक अवधि 104वें संविधान संशोधन के बाद आगे नहीं बढ़ाई गई। इसलिए वर्तमान अध्ययन में 2 मनोनीत आंग्ल-भारतीय सीटों को सक्रिय व्यवस्था का भाग न मानें।

⚠️ 552 वाला पुराना तथ्य

पुरानी परीक्षा पुस्तकों में 552 व्यापक रूप से मिलता है। वर्तमान सक्रिय व्यवस्था में लोकसभा में 543 निर्वाचित सीटें हैं और आंग्ल-भारतीय मनोनयन समाप्त हो चुका है।

09

लोकसभा सदस्य और कार्यकाल

25 वर्ष और पाँच वर्ष

लोकसभा सदस्य निर्वाचित होने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष है।

लोकसभा का सामान्य कार्यकाल उसकी प्रथम बैठक की निर्धारित तारीख से 5 वर्ष होता है, यदि उसे इससे पहले भंग न कर दिया जाए।

राष्ट्रीय आपातकाल लागू रहने के दौरान संसद कानून बनाकर लोकसभा का कार्यकाल एक बार में अधिकतम एक वर्ष बढ़ा सकती है।

लेकिन आपातकाल समाप्त हो जाने के बाद यह विस्तार छह महीने से अधिक जारी नहीं रह सकता।

10

लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष

अनुच्छेद 93

लोकसभा अपने सदस्यों में से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करती है।

लोकसभा अध्यक्ष अपना त्यागपत्र लोकसभा उपाध्यक्ष को देता है।

उपाध्यक्ष अपना त्यागपत्र अध्यक्ष को देता है।

लोकसभा अध्यक्ष का कार्यालय लोकसभा की कार्यवाही, नियमों की व्याख्या और सदन की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यदि पक्ष और विपक्ष में मतों की संख्या बराबर हो जाए तो अध्यक्ष निर्णायक मत दे सकता है।

किसी विधेयक के धन विधेयक होने या न होने का अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष करता है।

लोकसभा सचिवालय अध्यक्ष के नियंत्रण में कार्य करता है।

11

लोकसभा अध्यक्ष को हटाना

साधारण उपस्थित बहुमत नहीं

लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए लोकसभा में प्रस्ताव पारित किया जा सकता है।

ऐसा प्रस्ताव सदन की तत्कालीन कुल सदस्य-संख्या के बहुमत से पारित होना चाहिए।

इसके लिए कम से कम 14 दिन की पूर्व सूचना आवश्यक होती है।

⚠️ सुधार

केवल “लोकसभा के सभी सदस्य बहुमत से हटा सकते हैं” कहना अस्पष्ट है। सही शब्द है—सदन की तत्कालीन कुल सदस्य-संख्या का बहुमत।

12

लोकसभा की प्रमुख शक्तियाँ

सरकार की उत्तरदायित्व व्यवस्था

धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।

केंद्रीय मंत्रिपरिषद संविधान के अनुच्छेद 75(3) के अनुसार लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है।

लोकसभा सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित कर सकती है।

सरकार स्वयं सदन में अपना बहुमत प्रदर्शित करने के लिए विश्वास प्रस्ताव ला सकती है।

प्रश्न, चर्चा, प्रस्ताव, बजट और संसदीय समितियों के माध्यम से लोकसभा कार्यपालिका को उत्तरदायी बनाए रखती है।

13

लोकसभा सीटों का पुनर्समायोजन

अनुच्छेद 82 और जनगणना

अनुच्छेद 82 प्रत्येक जनगणना के बाद लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों और सीटों के पुनर्समायोजन के लिए संवैधानिक आधार प्रदान करता है।

संवैधानिक संशोधनों के कारण राज्यों के बीच लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण को 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के प्रासंगिक आँकड़े प्रकाशित होने तक स्थगित रखा गया है।

इसलिए परीक्षा में इसे केवल “1971 की जनगणना के आधार पर हमेशा के लिए सीटें निर्धारित हैं” नहीं लिखना चाहिए।

14

31वाँ संविधान संशोधन

लोकसभा प्रतिनिधित्व में वृद्धि

31वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1973 द्वारा लोकसभा में राज्यों के प्रतिनिधित्व की अधिकतम सीमा बढ़ाई गई।

पुरानी पुस्तकों में इसे लोकसभा की अधिकतम निर्वाचित सदस्य-संख्या में वृद्धि के रूप में पढ़ाया जाता है। इसे वर्तमान 543 सदस्यीय लोकसभा से अलग ऐतिहासिक तथ्य के रूप में याद करें।

15

संयुक्त बैठक

अनुच्छेद 108

यदि किसी सामान्य विधेयक को लेकर लोकसभा और राज्यसभा के बीच संविधान में वर्णित प्रकार का गतिरोध उत्पन्न हो जाए तो राष्ट्रपति दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुला सकता है।

संयुक्त बैठक की अध्यक्षता सामान्यतः लोकसभा अध्यक्ष करता है।

लोकसभा अध्यक्ष अनुपस्थित होने पर लोकसभा उपाध्यक्ष और उसके भी अनुपस्थित होने पर राज्यसभा उपसभापति अध्यक्षता कर सकता है।

धन विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं है।

16

अब तक की संयुक्त बैठकें

तीन ऐतिहासिक अवसर

वर्षविधेयक
1961 दहेज निषेध विधेयक, 1959।
1978 बैंकिंग सेवा आयोग निरसन विधेयक, 1977।
2002 आतंकवाद निवारण विधेयक, 2002।
17

धन विधेयक

अनुच्छेद 110

धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।

धन विधेयक प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश आवश्यक होती है।

किसी विधेयक के धन विधेयक होने या न होने का निर्णय लोकसभा अध्यक्ष करता है।

राज्यसभा इसे अधिकतम 14 दिन तक रख सकती है और केवल सिफारिशें भेज सकती है।

यदि राज्यसभा 14 दिन में विधेयक वापस नहीं करती तो वह लोकसभा द्वारा पारित रूप में ही दोनों सदनों से पारित माना जाता है।

धन विधेयक पर दोनों सदनों की संयुक्त बैठक नहीं होती।

🎯 सूत्र

धन विधेयक → केवल लोकसभा → राष्ट्रपति की सिफारिश → अध्यक्ष का निर्णय → राज्यसभा 14 दिन।

18

वित्त विधेयक और धन विधेयक

महत्वपूर्ण अंतर

प्रत्येक धन विधेयक वित्तीय प्रकृति का विधेयक होता है, लेकिन प्रत्येक वित्त विधेयक धन विधेयक नहीं होता।

धन विधेयक की विशेष पहचान अनुच्छेद 110 में दिए केवल उन विषयों से होती है जिन्हें संविधान धन विधेयक के विषय मानता है।

वित्तीय विधेयकों के लिए अनुच्छेद 117 में विशेष प्रावधान दिए गए हैं।

धन विधेयक को छोड़कर अन्य विधेयकों के मामले में संविधान की शर्तें पूरी होने पर दोनों सदनों के बीच गतिरोध का समाधान संयुक्त बैठक से संभव हो सकता है।

19

विधेयक कहाँ प्रस्तुत किया जा सकता है?

साधारण, धन और संविधान संशोधन विधेयक

साधारण विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है।

धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।

संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा या राज्यसभा—किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है।

संविधान संशोधन विधेयक के मामले में दोनों सदनों की शक्तियाँ समान हैं और गतिरोध होने पर संयुक्त बैठक नहीं होती।

20

राज्य विधानमंडल में धन विधेयक

राज्य स्तर की व्यवस्था

जिन राज्यों में द्विसदनीय विधानमंडल है वहाँ धन विधेयक केवल विधानसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।

राज्य में धन विधेयक प्रस्तुत करने के लिए राज्यपाल की सिफारिश आवश्यक होती है।

विधान परिषद धन विधेयक पर बाध्यकारी संशोधन नहीं कर सकती और इसे अधिकतम 14 दिन तक रख सकती है।

21

संसद के सत्र और गणपूर्ति

छह महीने और एक-दशमांश

संसद के एक सत्र की अंतिम बैठक और अगले सत्र की पहली बैठक के बीच छह महीने से अधिक अंतर नहीं हो सकता।

इसी कारण व्यवहार में संसद को वर्ष में कम से कम दो बार अवश्य मिलना पड़ता है, हालांकि संविधान बजट, मानसून और शीतकालीन जैसे सत्रों के नाम निर्धारित नहीं करता।

लोकसभा और राज्यसभा में गणपूर्ति संबंधित सदन की कुल सदस्य-संख्या का एक-दशमांश है।

22

प्रश्नकाल और शून्यकाल

संसदीय कार्यवाही

सदन की बैठक का वह निर्धारित समय जिसमें सदस्य मंत्रियों से प्रश्न पूछते हैं, प्रश्नकाल कहलाता है।

परंपरागत रूप से लोकसभा में बैठक का पहला घंटा प्रश्नकाल रहा है, लेकिन समय सदन की कार्यसूची और नियमों के अनुसार निर्धारित होता है।

शून्यकाल भारतीय संसदीय व्यवहार से विकसित एक प्रथा है। इसका संविधान में उल्लेख नहीं है और “शून्यकाल” शब्द औपचारिक संसदीय नियमों में मूलतः परिभाषित नहीं है।

यह सामान्यतः प्रश्नकाल तथा पत्रों को पटल पर रखे जाने के बाद सूचीबद्ध कार्य शुरू होने से पहले महत्वपूर्ण सार्वजनिक विषय उठाने के लिए प्रयोग होता है।

शून्यकाल की अवधि को हमेशा “अधिकतम ठीक एक घंटा” मानना सही नहीं है; वास्तविक अवधि सदन की कार्यवाही और पीठासीन अधिकारी के निर्णय पर निर्भर कर सकती है।

23

सदन से 60 दिन अनुपस्थित रहने का नियम

अनुच्छेद 101

यदि संसद का कोई सदस्य सदन की अनुमति के बिना 60 दिनों की अवधि तक सदन की सभी बैठकों से अनुपस्थित रहता है तो सदन उसकी सीट रिक्त घोषित कर सकता है।

यह सदस्यता अपने-आप उसी क्षण समाप्त नहीं होती; संबंधित सदन को सीट रिक्त घोषित करने की शक्ति है।

60 दिनों की गणना में संसद के सत्रावसान अथवा लगातार चार दिनों से अधिक के स्थगन की अवधि को संविधान के अनुसार बाहर रखा जाता है।

⚠️ सुधार

“60 दिन अनुपस्थित = सदस्यता स्वतः समाप्त” गलत है। सदन सीट को रिक्त घोषित कर सकता है।

24

प्रोटेम अध्यक्ष

नई लोकसभा की प्रारंभिक व्यवस्था

नई लोकसभा के गठन के बाद स्थायी अध्यक्ष के चुनाव से पहले राष्ट्रपति लोकसभा के किसी सदस्य को प्रोटेम अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के लिए नियुक्त करता है।

प्रोटेम अध्यक्ष का प्रमुख प्रारंभिक कार्य नव-निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाने की प्रक्रिया संचालित करना और स्थायी अध्यक्ष के चुनाव तक आवश्यक कार्यवाही चलाना होता है।

25

संसदीय समितियाँ

प्रशासन और वित्त पर नियंत्रण

भारतीय संसद विशाल प्रशासनिक कार्यों की सूक्ष्म जाँच संसदीय समितियों के माध्यम से करती है।

प्रमुख वित्तीय समितियाँ हैं—लोक लेखा समिति, प्राक्कलन समिति और सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति।

इसके अतिरिक्त विशेषाधिकार समिति, आचार समिति, याचिका समिति और विभाग-संबंधी स्थायी समितियाँ भी महत्वपूर्ण हैं।

26

लोक लेखा समिति

22 सदस्य

लोक लेखा समिति में अधिकतम 22 सदस्य होते हैं।

इनमें 15 सदस्य लोकसभा से और 7 सदस्य राज्यसभा से चुने जाते हैं।

समिति का कार्यकाल एक वर्ष होता है।

समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष समिति के लोकसभा सदस्यों में से करता है।

1967 से सामान्य संसदीय परंपरा रही है कि लोक लेखा समिति का अध्यक्ष विपक्ष से चुना जाए।

लोक लेखा समिति नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की उन रिपोर्टों और विनियोग खातों की जाँच करती है जो संसद के समक्ष रखे जाते हैं।

समिति अपनी रिपोर्ट संसद के समक्ष प्रस्तुत करने की संसदीय प्रक्रिया के अनुसार देती है।

27

प्राक्कलन समिति

केवल लोकसभा

प्राक्कलन समिति में 30 सदस्य होते हैं।

इसके सभी सदस्य लोकसभा से चुने जाते हैं। राज्यसभा का इसमें कोई प्रतिनिधित्व नहीं होता।

समिति का कार्यकाल एक वर्ष होता है।

यह सरकारी खर्च में अर्थव्यवस्था, दक्षता और प्रशासनिक सुधार की संभावनाओं की जाँच करती है।

28

विशेषाधिकार समितियाँ

दोनों सदनों में अलग समिति

लोकसभा की विशेषाधिकार समिति में 15 सदस्य होते हैं।

राज्यसभा में भी अपनी अलग विशेषाधिकार समिति होती है।

इसलिए “एक संयुक्त विशेषाधिकार समिति में 15 लोकसभा + 10 राज्यसभा = 25 सदस्य” लिखना सही नहीं है।

29

संचित निधि, आकस्मिकता निधि और लेखानुदान

सरकारी वित्त

भारत सरकार को प्राप्त राजस्व, सरकार द्वारा लिए गए ऋण और ऋणों की वसूली से प्राप्त धन का संवैधानिक रूप से निर्धारित भाग भारत की संचित निधि में जाता है।

भारत की संचित निधि से कोई धन संविधान और कानून द्वारा निर्धारित संसदीय प्राधिकरण के बिना सामान्यतः नहीं निकाला जा सकता।

लेखानुदान सरकार को विनियोग विधेयक की पूर्ण प्रक्रिया समाप्त होने से पहले सीमित अवधि के लिए आवश्यक व्यय हेतु अग्रिम संसदीय स्वीकृति उपलब्ध कराता है।

भारत की आकस्मिकता निधि राष्ट्रपति के निपटान में रखी जाती है ताकि अप्रत्याशित व्यय के लिए अग्रिम राशि उपलब्ध कराई जा सके। बाद में संसद द्वारा आवश्यक विनियोग स्वीकृत किया जाता है।

यह कहना कि राष्ट्रपति अपनी व्यक्तिगत इच्छा से बिना किसी आगे की संसदीय प्रक्रिया के इस निधि को खर्च करता है, सही नहीं है।

30

कटौती प्रस्ताव

समापन प्रस्ताव से अलग

कटौती प्रस्ताव का उपयोग लोकसभा में किसी मंत्रालय की अनुदान मांग की राशि में कमी का प्रस्ताव करने के लिए किया जाता है।

इसके प्रमुख प्रकार हैं—नीति कटौती, अर्थव्यय कटौती और सांकेतिक कटौती।

कटौती प्रस्ताव को समापन प्रस्ताव नहीं कहा जाता।

समापन प्रस्ताव का उद्देश्य सदन में चल रही बहस को समाप्त कर विषय को मतदान के लिए रखने की दिशा में कार्यवाही करना होता है; दोनों अलग संसदीय उपकरण हैं।

31

अंतरराष्ट्रीय संधियाँ और संसद

अनुच्छेद 253

संसद को किसी अंतरराष्ट्रीय संधि, समझौते या सम्मेलन को लागू करने के लिए भारत के पूरे या किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है।

अनुच्छेद 253 के अंतर्गत ऐसी विधायी शक्ति राज्य सूची के विषय तक भी विस्तृत हो सकती है और इसके लिए प्रत्येक राज्य की अलग सहमति संवैधानिक रूप से आवश्यक नहीं होती।

32

लोकसभा और राज्यसभा में राज्यों का प्रतिनिधित्व

उत्तर प्रदेश सबसे आगे

उत्तर प्रदेश के पास लोकसभा में 80 सीटें हैं, जो किसी भी राज्य की सर्वाधिक संख्या है।

उत्तर प्रदेश को राज्यसभा में 31 सीटें आवंटित हैं, जो किसी भी राज्य की सर्वाधिक संख्या है।

2024 के लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र-विन्यास के अनुसार अनुसूचित जनजातियों के लिए सर्वाधिक 6 लोकसभा सीटें मध्य प्रदेश में आरक्षित हैं।

33

लोकसभा निर्वाचन से जुड़े ऐतिहासिक तथ्य

प्रथम चुनाव से पहली महिला अध्यक्ष तक

भारत का पहला आम लोकसभा चुनाव 1951–52 में हुआ। निर्वाचन प्रक्रिया अक्टूबर 1951 से फरवरी 1952 तक विभिन्न चरणों में चली।

पहले आम चुनाव में लोकसभा की 489 सीटों के लिए चुनाव हुआ।

जी. वी. मावलंकर प्रथम लोकसभा के प्रथम अध्यक्ष बने।

मीरा कुमार भारत की लोकसभा की प्रथम महिला अध्यक्ष बनीं और 2009 से 2014 तक इस पद पर रहीं।

राज्यसभा के लिए मनोनीत होने वाली प्रारंभिक प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्रियों में नरगिस दत्त का नाम महत्वपूर्ण है; वे 1980 में राज्यसभा के लिए मनोनीत हुईं।

34

लद्दाख लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र

क्षेत्रफल की दृष्टि से

लद्दाख लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र अत्यंत विशाल भौगोलिक क्षेत्र वाला निर्वाचन क्षेत्र है और सामान्य प्रतियोगी परीक्षा सामग्री में इसे क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र माना जाता है।

35

वयस्क मताधिकार

18 वर्ष

संविधान के 61वें संशोधन अधिनियम, 1988 द्वारा मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की गई।

यह व्यवस्था 1989 से चुनावी कानून में प्रभावी हुई।

इसे सामान्य वयस्क होने की सभी वैधानिक अवधारणाओं के साथ न मिलाएँ; यहाँ मुख्य तथ्य मतदान की आयु है।

36

प्रधानमंत्री का वेतन और संचित निधि

एक सामान्य भ्रम

प्रधानमंत्री को मंत्री और संसद सदस्य के रूप में कानून द्वारा निर्धारित वेतन और भत्ते प्राप्त होते हैं।

प्रधानमंत्री के वेतन और भत्तों को राष्ट्रपति, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक या सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की तरह भारत की संचित निधि पर भारित व्यय की श्रेणी में नहीं रखा जाता।

37

संसद और न्यायिक समीक्षा

संविधान सर्वोच्च

भारतीय संसद ब्रिटिश संसद की तरह असीमित विधायी संप्रभुता वाली संस्था नहीं है।

संसद की शक्तियाँ लिखित संविधान से प्राप्त होती हैं और वे संविधान की सीमाओं के अधीन हैं।

सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय संविधान-विरोधी कानूनों की न्यायिक समीक्षा कर सकते हैं।

संविधान संशोधन की संसद की शक्ति भी संविधान की मूल संरचना को नष्ट नहीं कर सकती।

38

महत्वपूर्ण भ्रम और सही तथ्य

एक बार में अंतिम सुधार

गलत: भारतीय संसद देश की पूर्णतः सर्वोच्च संस्था है।
सही: भारतीय व्यवस्था में संविधान सर्वोच्च है; संसद संविधान और न्यायिक समीक्षा के अधीन है।

अधूरा: राष्ट्रपति संसद की बैठक स्थगित करता है।
सही: राष्ट्रपति सदन को आहूत और सत्रावसित करता है; बैठक का स्थगन पीठासीन अधिकारी करता है।

पुराना: लोकसभा की वर्तमान अधिकतम संरचना 552 है जिसमें 2 आंग्ल-भारतीय सदस्य शामिल हैं।
सही: आंग्ल-भारतीय मनोनयन की विशेष व्यवस्था आगे नहीं बढ़ाई गई; वर्तमान निर्वाचित लोकसभा 543 सीटों की है।

गलत: वर्तमान राज्यसभा में 229 राज्य सदस्य + 4 संघ राज्यक्षेत्र सदस्य हैं।
सही: वर्तमान निर्धारित शक्ति 233 निर्वाचित + 12 मनोनीत है; निर्वाचित प्रतिनिधियों में राज्यों के साथ दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर के प्रतिनिधि शामिल हैं।

गलत: संसद/विधानसभा सदस्य 60 दिन अनुपस्थित रहे तो सदस्यता स्वतः समाप्त।
सही: संबंधित सदन उसकी सीट रिक्त घोषित कर सकता है।

गलत: शून्यकाल अधिकतम अनिवार्य रूप से एक घंटा होता है।
सही: शून्यकाल संसदीय परंपरा है; अवधि कार्यवाही के अनुसार बदल सकती है।

गलत: कटौती प्रस्ताव को समापन प्रस्ताव कहते हैं।
सही: दोनों अलग संसदीय प्रक्रियाएँ हैं।

गलत: एक संयुक्त विशेषाधिकार समिति में लोकसभा 15 + राज्यसभा 10 = 25 सदस्य होते हैं।
सही: लोकसभा और राज्यसभा की अपनी-अपनी विशेषाधिकार समितियाँ हैं।

गलत: आकस्मिकता निधि राष्ट्रपति अपनी व्यक्तिगत इच्छा से अंतिम रूप से खर्च कर सकता है।
सही: अप्रत्याशित व्यय के लिए अग्रिम दिया जाता है और बाद में संसदीय विनियोग की प्रक्रिया होती है।

गलत: प्रत्येक विधेयक किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है।
सही: साधारण और संविधान संशोधन विधेयक किसी भी सदन में; धन विधेयक केवल लोकसभा में।

गलत: संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त बैठक हो सकती है।
सही: संविधान संशोधन विधेयक और धन विधेयक पर संयुक्त बैठक नहीं होती।

⚡ अंतिम पुनरावृत्ति

79 — संसद = राष्ट्रपति + राज्यसभा + लोकसभा।

80 — राज्यसभा की संरचना।

81 — लोकसभा की संरचना।

85 — सत्र, सत्रावसान और लोकसभा विघटन।

105 — संसदीय विशेषाधिकार।

108 — संयुक्त बैठक।

110 — धन विधेयक।

111 — राष्ट्रपति की स्वीकृति।

117 — वित्तीय विधेयक।

123 — अध्यादेश।

249 — राष्ट्रीय हित में राज्य सूची पर संसद की शक्ति।

253 — अंतरराष्ट्रीय संधि लागू करने हेतु संसद की शक्ति।

312 — अखिल भारतीय सेवा।

368 — संविधान संशोधन।

राज्यसभा अधिकतम — 250।

राज्यसभा निर्धारित वर्तमान शक्ति — 245 = 233 निर्वाचित + 12 मनोनीत।

राज्यसभा — स्थायी सदन — सदस्य कार्यकाल 6 वर्ष — लगभग 1/3 सदस्य प्रत्येक दो वर्ष में सेवानिवृत्त।

राज्यसभा सदस्य न्यूनतम आयु — 30 वर्ष।

राज्यसभा सभापति — भारत का उपराष्ट्रपति।

लोकसभा की वर्तमान निर्वाचित सीटें — 543।

लोकसभा सदस्य न्यूनतम आयु — 25 वर्ष।

लोकसभा सामान्य कार्यकाल — 5 वर्ष।

लोकसभा अध्यक्ष — लोकसभा के सदस्यों द्वारा चुना जाता है।

धन विधेयक — केवल लोकसभा।

राज्यसभा धन विधेयक — अधिकतम 14 दिन।

धन विधेयक है या नहीं — लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय।

अविश्वास प्रस्ताव — लोकसभा।

मंत्रिपरिषद — लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी।

संयुक्त बैठक — राष्ट्रपति बुलाता है; अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करता है।

संयुक्त बैठक अब तक — दहेज निषेध, बैंकिंग सेवा आयोग निरसन, आतंकवाद निवारण विधेयक।

धन विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त बैठक नहीं।

संसद के दो सत्रों के बीच अधिकतम अंतर — 6 महीने।

गणपूर्ति — कुल सदस्य-संख्या का 1/10।

प्रश्नकाल — मंत्रियों से प्रश्न पूछने का निर्धारित समय।

शून्यकाल — भारतीय संसदीय परंपरा; संविधान में उल्लेख नहीं।

लोक लेखा समिति — 22 = 15 लोकसभा + 7 राज्यसभा — कार्यकाल 1 वर्ष।

प्राक्कलन समिति — 30 सदस्य — सभी लोकसभा — कार्यकाल 1 वर्ष।

मध्य प्रदेश — अनुसूचित जनजाति के लिए सर्वाधिक 6 लोकसभा आरक्षित सीटें।

उत्तर प्रदेश — लोकसभा 80 और राज्यसभा 31 — दोनों में राज्यों में सर्वाधिक प्रतिनिधित्व।

प्रथम आम चुनाव — 1951–52।

प्रथम लोकसभा अध्यक्ष — जी. वी. मावलंकर।

प्रथम महिला लोकसभा अध्यक्ष — मीरा कुमार।

मतदान की न्यूनतम आयु — 18 वर्ष — 61वाँ संविधान संशोधन।

भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में संसद नहीं, संविधान सर्वोच्च है।

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